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14 हजार के लिए खतरे में डाली बोर्ड परीक्षा की शुचिता

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अमर उजाला ब्यूरो
हरदोई।
बीती 31 जनवरी को जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाओं को शुचिता पूर्ण ढंग से नकल विहीन कराने के मंत्र वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए दे रहे थे, उसी वक्त बोर्ड के नियमों की धज्जियां उड़ रही थीं। महज 14 हजार रुपये के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों ने बोर्ड परीक्षा की शुचिता खतरे में डाल दी। 14 हजार रुपये बोर्ड ने जिला विद्यालय निरीक्षक को सिर्फ इसलिए उपलब्ध कराए थे ताकि परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र पहुंचा दिए जाएं।


आगामी छह फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। जनपद में कुल 174 परीक्षा केंद्र हैं। परीक्षा की तैयारियों में पिछले कई दिनों से न सिर्फ जिलाधिकारी सहित अन्य अफसर लगातार जुटे हुए हैं, बल्कि नकल विहीन परीक्षा को लेकर पूरी रणनीति तैयार कर चुके हैं। अफसोस यह है कि माध्यमिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों ने ही परीक्षा को लेकर लापरवाही दिखा दी। बीती 30 जनवरी को वीरांगना उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जिओ के कर्मचारी को जीआईसी बुलाकर हाईस्कूल के चार और इंटरमीडिएट के सात बंडल बनाकर दिए गए। यह सभी बंडल प्रशभनपत्रों के थे। हाईस्कूल के प्रशभनपत्रों का एक बंडल गायब हो गया।
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डीएम ने डीआईओएस से प्रशभननपत्र परीक्षा केंद्रों को उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई बोर्ड की नियमावली तलब की, तो अब पता चला है कि नियमानुसार डीआईओएस अथवा बोर्ड परीक्षा के प्रभारी को प्रशभनपत्र संबंधित परीक्षा केंद्र तक भेजे जाने की व्यवस्था अपने स्तर से करनी थी। इसके लिए बाकायदा 14 हजार रुपये का बजट भी बोर्ड ने भेजा था। यह रुपये बचाने या फिर अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च करने की नीयत ने पूरी बोर्ड परीक्षा की शुचिता को ही खतरे में डाल दिया। डीएम पुलकित खरे का कहना है कि इस मामले में जो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।


- परीक्षा केंद्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने की जिम्मेदारी है डीआईओएस की
- डीआईओएस ने जीआईसी बुलवाकर बंटवाए प्रशभनपत्रों के बंडल
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