स्वरोजगार प्रदान करने का दावा करने वाली मुख्यमंत्री
ग्रामोद्योग रोजगार योजना एवं प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत
इस वित्तीय वर्ष में दो करोड़ का ऋण बांट 62 इकाइयों को स्थापित कर 1049
लोगों को रोजगार दिलाने का विभागीय दावा किया गया है।
यह बात और है कि
स्वरोजगार स्थापित करने को आज भी बेरोजगार बैंकों के चक्कर काटते नजर आते
हैं। ग्रामीण औद्योगिक के क्षेत्र में यूपी खादी ग्रामोद्योग बोर्ड की
अहम भूमिका है। इसका सीधा संबंध ग्रामीण अर्थव्यवस्था, एससी/एसटी,
अल्पसंख्यक, महिलाएं, विकलांग भूतपूर्व सैनिक एवं पिछड़े व कमजोर वर्गों के
उत्थान से है।
शिक्षित बेरोजगार युवकों का शहर की ओर पलायन रोकने के
उद्देश्य से गांव में ही स्वरोजगार के मौके मुहैया कराने को प्रदेश शासन
द्वारा जिला सेक्टर के तहत पूंजी निवेश की ग्रामोद्योग इकाइयां ग्रामीण
क्षेत्र में स्थापित करने को यह योजना शुरू करने का दावा किया जाता रहा है।
मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग योजना के तहत बैंकों से 10 लाख रुपये और
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत 25 लाख तक पूंजी निवेश इकाइयों
को ऋण स्वीकृत करा कर चार प्रतिशत ब्याज का वहन उद्यमी द्वारा तथा चार
प्रतिशत से अधिक ब्याज की धनराशि अधिकतम 10 प्रतिशत तक उत्पादन के रूप में
जिला सेक्टर से वहन किया जाता है।
इसको लेकर चयन कमेटी द्वारा
बेरोजगारों का साक्षात्कार लिया जाता है और उसके बाद उनकी फाइलों को बैंकों
के पास भेजे जाते हैं। इस बाबत जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी सुधीर दुबे
का कहना है कि वित्तीय वर्ष 14-15 में सौ फीसदी लक्ष्य को पूरा कर लिया
गया है।
एक करोड़ पांच लाख मुख्यमंत्री खादी ग्रामोद्योग योजना में एवं 99
लाख 48 हजार प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत बैंकों के माध्यम
से लोन दिलाया गया है। भौतिक व वित्तीय लक्ष्य दोनों की पूर्ति की गई है।
बजट आते ही जल्द एक बार फिर से आवेदन लिए जाएंगे।
उधर, बेरोजगारों का कहना
है कि साक्षात्कार में तो स्वीकृति दे दी जाती है, पर बैंक लोन देने में
राजी नहीं होती है। लोन स्वीकृत कराने में बैंकों के काफी चक्कर लगाने
पड़ते हैं। उधर, दुबे ने बताया कि जिले के उत्पादों को अन्य जिलों में
सराहा जा रहा है। इलाहाबाद में लगे मेले में फर्नीचर निर्माण में इकाई को
कैबिनेट मंत्री द्वारा पुरस्कृत किया गया है।