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Hardoi News: 75 लाख रुपये के 39 वेंटीलेटर सर्जिकल वार्ड में तोड़ रहे दम

Fri, 18 Apr 2025 12:21 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
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फोटो-10- मेडिकल कॉलेज के कक्ष में बंद रखे वेंटिलेटर। संवाद
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- सर्जिकल वार्ड के एक कमरे में कई साल से बंद हैं वेंटीलेटर
- कोविड संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान पीएम केयर फंड से हुई थी खरीद
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। तकरीबन 75 लाख रुपये खर्च कर कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बाद खरीदे गए वेंटीलेटर मेडिकल कॉलेज के सर्जिकल वार्ड के एक कमरे में कबाड़ हो रहे हैं। लंबे समय से इस्तेमाल न किए जाने के कारण प्राथमिक तौर पर अब इनका इस्तेमाल करने के लिए वृहद स्तर पर मरम्मत करानी होगी। हद तो यह कि मेडिकल कॉलेज बन जाने के बाद भी किसी जिम्मेदार ने इन वेंटीलेटरों की तरफ ध्यान नहीं दिया। कुल मिलाकर आपात स्थिति में मरीजों को जिंदगी देने वाले वेंटीलेटर खुद ही दम तोड़ रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज बनने के बाद यहां की स्वास्थ्य सेवाओं में अमूलचूल परिवर्तन की उम्मीद स्थानीय लोग लगाए थे। काफी हद तक परिस्थितियों में बदलाव भी आया, लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी व्यवस्थाओं और संसाधनों को बीमार कर रही है। मेडिकल कॉलेज में पहले से उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल ही नहीं किया जा रहा है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान वर्ष 2021 में पीएम केयर फंड से 39 पोर्टेबल वेंटीलेटर खरीदे गए थे। एक वेंटीलेटर पर लगभग पौने दो लाख रुपये खर्च हुए थे। कोरोना संक्रमण के दौरान इनका इस्तेमाल हुआ, लेकिन फिर इन्हें मेडिकल कॉलेज के सर्जिकल वार्ड के एक कमरे में ताले में बंद कर दिया गया। लंबे समय से वेंटीलेटर का इस्तेमाल ही नहीं किया गया है।
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इन मरीजों को होती है वेंटिलेटर की जरूरत
हरदोई। मेडिकल कॉलेज के डॉ. अमित शर्मा ने बताया कि जिन मरीजों का ऑक्सीजन लेवल 60 के नीचे चला जाता है। उन्हें वेंटिलेटर पर लेना चाहिए। सांप काटने वाले मरीज को अगर सांस लेने में दिक्कत तो उसे भी वेंटिलेटर पर रखकर उपचार देना चाहिए। इसके अलावा श्वांस रोग से पीड़ित मरीजों, सिर में गंभीर चोट से घायल मरीजों और ह्रदय रोगियों को भी वेंटीलेटर पर रखने की जरूरत आम तौर पड़ती है।


गंभीर मरीजों को नहीं मिल रहा लाभ
हरदोई। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में कई मरीज ऐसे भी आते हैं जिनको फौरन वेंटिलेटर की जरूरत होती है। इनमें सांस और हृदय रोगी तो होते ही हैं। दुर्घटनाओं में घायल भी कई मरीजों को वेंटिलेटर देने की जरूरत पड़ जाती है लेकिन गंभीर मरीजों को भी अस्पताल में सुविधा होने के बाद भी उपचार नहीं मिल रहा है। उन्हें दूसरे जिले या फिर निजी अस्पताल में जाने की सलाह दे जाती है। इससे कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देता है।
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वर्जन
मेडिकल कालेज के सह आचार्य व मीडिया प्रभारी डॉ. शिवम यादव ने बताया कि कि सभी वेंटिलेटर क्रियाशील हैं। इन्हें चलाने के लिए एनेस्थेटिस्ट, मेडिसिन और सर्जरी के लोग भी पर्याप्त हैं, लेकिन ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर नहीं है। साथ ही अभी जरूरत भी नहीं पड़ रही है। इस कारण से वेंटिलेटरों का प्रयोग नहीं हो रहा है।
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