जिले में 33 किशोरियां लापता हैं। ये कहां और किस हाल
में हैं, इसकी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। इनकी खोज के लिए परिजन पुलिस
अफसरों के चक्कर काट रहे हैं। हालांकि पुलिस इन किशोरियों का सुराग लगाने
को नई रणनीति अपनाते हुए टीमें गठित करने का दावा कर रही है।
शहर में
कोर्ट और पुलिस अधिकारियों के कार्यालय में प्रतिदिन ऐसे लोगों की भीड़
जुटती है, जिसमें कोई अपनी बेटी को कोई अपनी बहन की तलाश लिए भटकता मिलता
है। वह अपनी बेटी और बहन को वापस घर पहुंचाने के लिए अफसरों से अनुनय विनय
करता है। अफसर जांच जारी होने की दुहाई देकर उसे टरका देते हैं।
हालांकि
पुलिस ने इन गायब किशोरियों को ढूढने के लिए नई सिरे से टीमें गठित करने का
दावा किया है। इससे उम्मीद की एक किरण जगी है। फिलहाल पुलिस विभाग के
आंकड़ों की मानें तो जिले की 33 किशोरियों का सुराग नहीं लगा है।
इन लापता
33 किशोरियों में 31 किशोरियां 14 से 16 आयु वर्ग की हैं, जबकि दो की उम्र
18-19 वर्ष के आसपास है। लापता किशोरियों में वर्ष 2014 में गायब हुई 12
किशोरियां और वर्ष 2015 में 15 जून तक 21 किशोरियां शामिल हैं। इस वर्ष के
छह माह में अब तक 57 मामले किशोरियों के भागने के दर्ज हो चुके हैं, जिसमें
36 किशोरियां मिल चुकी है, लेकिन अभी तक 21 किशोरियों का पता नहीं चल सका
है।
वहीं वर्ष 2014 की 12 किशोरियों का अभी तक भी सुराग नहीं लग सका है।
इससे इनके परिवार के सदस्य बड़े पुलिस अधिकारियों के चक्कर काटने को विवश
हैं।