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25 सौ साल पुराना हो सकता है तालाब से निकला तीर्थ

Mon, 06 Jun 2016 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/हरदोई
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तालाब में सीढ़ी - फोटो : अमर उजाला
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बेनीगंज। अहिरोरी विकास खंड के ग्राम जमुनिया के तालाब से निकला तीर्थ या स्थल 1500 से 2500 साल तक पुराना हो सकता है। यह बात जिले में पहुंची पुरातत्व विभाग की टीम के सदस्यों ने कही। उन्होंने कहा कि वह दावा तो नहीं करते पर प्रथमदृष्टया यहां मिलने वाला सब कुछ पाषाणकालीन लग रहा। बाकी आगे होने वाली खोज के बाद पता चलेगा।
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पुरातत्व विभाग की टीम के जमुनिया पहुंचने की सूचना पर सोमवार को सुबह से ही ग्रामीण तालाब के किनारे इकट्ठा हो गए थे। सुबह आठ बजे के करीब टीम के सदस्य वहां पहुंचे और मिट्टी से निकली सीढ़ियों, सिक्के व बर्तनों के साक्ष्य इकट्ठा किया। उन्होंने इतना ही कहा कि मंजर निश्चित रूप से मिट्टी के नीचे का है। यह 2500 साल पुराना भी हो सकता है। लेकिन अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। जानकारी जुटाने के बाद ही कुछ कहेंगे। इसके बाद टीम सदस्यों ने जिलाधिकारी विवेक वार्ष्णेय से भी जानकारी ली।

कहीं यह विष्णु तीर्थ तो नहीं
बेनीगंज। नैमिषारण्य आदिकाल से साधना स्थल एवं समाज में शांति एवं समरसता का केंद्र रहा है। इसी पवित्र भूमि से विश्व को समय-समय पर नई चेतना मिलती रही है। इसी तीर्थ में आदि काल में राजा मन अपना संपूर्ण राज पाठ त्याग करके नैमिषारण्य आदि गंगा गोमती के तट पर तपस्या एवं साधना में लीन हो गए।
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आदिकाव्य रामायण में इसका उद्धरण है। राजा मनु को आशीर्वाद देने के लिए ब्रह्मा, विष्णु एवं शंकर जी ने इस पावन धरती पर पदार्पण किया। उनके पदार्पण के फलस्वरूप आदि गंगा गोमती के किनारे ब्रह्मावर्त रुद्रा वर्ष एवं वैष्णो वर्ष के नाम से तीन स्थान उसी आदिकाल से स्थित हैं। जबकि विष्णु व्रत और ब्रह्मावर्त तीर्थ प्राय लुप्त हो चुके हैं अब उनके नामों की चर्चा तो हो रही है किंतु मौके पर उनके अवशेष मात्र ही नजर आ रहे हैं।

यही विलुप्त हुआ विष्णु तीर्थ मनरेगा मजदूरों की खुदाई के उपरांत उजागर हुआ है। जिसे लोग चमत्कार मानते हैं। जबकि ऐसा नहीं है यह आदिकाल से यहां पर स्थित था जो गोमती के  किनारे मिट्टी के ढह जाने से यह विलुप्त हो चुका था इस स्थान की खुदाई के उपरांत यह प्राचीन स्थल फिर से जीवंत हुआ जिसमें आसपास गांवों में दर्शकों की भीड़ लगी है।
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