नवरात्र के प्रथम दिन से शांतिकुंज हरिद्वार के
गायत्री शक्ति पीठ साधकों ने रविवार को जप पूर्ण करते हुए 24 हजार मंत्रों
से लघु अनुष्ठान किया। जिसमें साधकों ने मंत्रोच्चारण कर यज्ञ में आहुतियां
डाली और सभी साधकों द्वारा आहुतियां डालने तक यज्ञ चलता रहा।
गायत्री
शक्ति पीठ के परिजनों ने चैत्र नवरात्रि से शुरू होने वाले विक्रम संवत और
अंतिम दिन रामनवमी पर भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का महत्व भी बताया गया।
गायत्री शक्ति पीठ के तत्वावधान में नवरात्रि पूर्णाहुति का कार्य संपन्न
कराया गया।
शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा पूरे नौ दिन चले नियमानुसार जप पूर्ण
करने के बाद रविवार को 24 हजार मंत्र जय का लघु अनुष्ठान किया गया। साधिकाओं द्वारा यज्ञ पूर्ण होने तक आहुतियां डाली। हरिहर जी, शिव
शंकर व रमेश सिंह द्वारा यज्ञ का संचालन करते हुए चैत्र नवरात्र के महत्व
और इसी दिन से शुरू होने वाले विक्रम संवत के बारे में जानकारी दी।
बताया
कि महाराजा विक्रमादित्य ने राजा होते हुए भी लोक मंगल कार्यों के लिए
प्रसिद्धि प्राप्त की, इसलिए भारतीय संवत्सर की शुरुआत उनके नाम से ही होती
है। इसी प्रकार नौवें दिन श्रीरामचंद्र जी का जन्म रामनवमी के रूप में
मनाया जाता है। ऋतुओं के संधिकाल इन्हीं पर्वों पर पड़ते हैं, जो उपासना की
दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
सामूहिक साधना, अनुष्ठान की व्यवस्था उस अवसर पर
बहुत उपयोगी होती है। वर्तमान समय को युग संधिकाल के तत्वदर्शियों ने
स्वीकारा है, इसलिए युग निर्माण अभियान के सूत्र संचालकों ने हर भावनाशील
से अपेक्षा की है। नवरात्रि पर्व पर सामूहिक साधना अनुष्ठानों के लिए विशेष
रूप से प्रयास करें।
पूर्णाहुति के साथ ही विभिन्न संस्कार हुए इनमें
नामकरण, विद्यारंभ, जन्म दिवस और अन्न प्रासन आदि कराए गए। इस दौरान
शिशुपाल सिंह, सुरेश चंद्र त्रिपाठी, संजय सिंह, प्रेम चंद्र शुक्ल, डा.
धर्मेंद्र सिंह, आरडी पाल, निर्मला शुक्ला, गीता दीक्षित, शकुंतला अवस्थी,
निधि श्रीवास्तव आदि मौजूद थे।