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बोरवेल में उतरे दो युवकों की मौत

Wed, 05 Sep 2018 11:42 PM IST
hardoi
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राकेश की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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अतरौली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नाऊखेड़ा में 20 फीट गहरे बोरवेल में उतरकर पंखा सही करने गए दो युवकों  की मौत हो गई। बोरवेल में जहरीली गैस होने से दोनों की मौत होने की आशंका है।

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नाऊखेड़ा निवासी राकेश का खेत गांव से लगभग 200 मीटर दूर है। उसके खेत में बोरिंग है। बोरवेल का पंखा पिछले कुछ दिनों से खराब होने के कारण सिंचाई का कार्य बाधित हो रहा था। इसके चलते बुधवार को दोपहर लगभग 12 बजे राकेश (35) पुत्र कल्लू, गांव निवासी विकास (20) पुत्र हरिपाल, प्रभाष और शत्रोहन के साथ खेत पर गए थे। 20 फीट गहरे बोरवेल में राकेश और विकास एक साथ नीचे उतरे। लगभग आधे घंटे बाद जब बोरवेल में कोई चहल-पहल नहीं हुई तो शत्रोहन और प्रभाष भी नीचे उतरे। उन्हें राकेश और विकास अचेत अवस्था में पड़े मिले। दोनों को बोरवेल से निकलकर शत्रोहन और प्रभाष ने शोर मचाया तो ग्रामीणों की भीड़ लग गई। घटना की जानकारी परिजनों के साथ-साथ पुलिस को भी दी गई। दोनों को लेकर ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भरावन पहुंचे। यहां विकास को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि राकेश की हालत गंभीर बता लखनऊ रेफर किया गया। परिजन उसे लेकर लखनऊ जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। पुलिस ने दोनों शवों का पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अतरौली के प्रभारी निरीक्षक दीनानाथ मिश्रा ने बताया कि बोरवेल में उतरने पर जहरीली गैस फैलने से दोनों की मौत होने की बात सामने आई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।  

कार्बन मोनो आक्साइड बन जाती जानलेवा  
रसायन विज्ञान के प्रवक्ता राजेश तिवारी ने बताया कि जितना गहराई में जमीन के नीचे उतरा जाता है, उतना ही आक्सीजन कम हो जाती है। कार्बन मोनो आक्साइड बढ़ जाती है। 20 फीट नीचे भी पर्याप्त कार्बन मोनो आक्साइड होती है और इसके कारण दम घुटने लगता है और मौत हो जाती है। जब जमीन में गहरे उतरना जरूरी हो जाए तो आक्सीजन की वैकल्पिक व्यवस्था रखनी चाहिए।  
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बेसहारा हुआ परिवार
राकेश के पास नाममात्र को ही खेत था। वह जरूरत पड़ने पर मजदूरी भी कर लेता था। परिवार में पत्नी सोनावती, पुत्री सोनम (14), छोटी (12), छुटकन्नी (10), ज्ञानेंद्र (8) और कौशल (5) हैं। सोनावती की मानें तो बोरवेल के पंखे में आने वाली खराबी राकेश खुद ही सही कर लेते थे। यही कारण था कि किसी मिस्त्री को बुलाने की जरूरत नहीं पड़ी। कौन जानता था कि इस बार दुर्घटना हो जाएगी। उधर विकास के परिजनों में भी कोहराम मच गया। विकास अविवाहित था और सात भाई-बहनों में चौथे नंबर का था। परिवार का जीवन यापन विकास के भरोसे ही था।

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