नगर के छह विद्युत उपकेंद्रों पर आन लाइन बिलिंग
व्यवस्था शुरू करने को करीब 18 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद उपभोक्ताओं
को इसकी सुविधा नहीं मिल पा रही हैं। पावर कारपोरेशन की ओर से इन
उपकेंद्रों पर अतिरिक्त कक्ष बनाकर कंप्यूटर और सर्वर सहित अन्य सिस्टम भी
लगा दिए गए, फिर भी सिटी उपकेंद्र को छोड़ अन्य उपकेंद्र पर काम शुरू नहीं
हो पा रहा।
विभागीय अफसरों की मानेे तो एक केंद्र पर करीब 3 लाख रुपये
का खर्चा आया है। आशा नगर उपकेंद्र, सांडी रोड उपकेंद्र, कोयल बाग,
गुरगुज्जा और बेलाताली उपकें द्रों पर भी सिस्टम लगने के साथ ही सर्वर
लगाकर टावर भी लगा दिए गए, पर यहां पर भी आनलाइन बिलिंग जमा करने की
व्यवस्था नहीं दी गई, जिससे आम उपभोक्ताओं को परेशान होना पड़ता है।
वहीं
चरौली उपकेंद्र पर अब यह सिस्टम नहीं लगाये जा सके। ज्ञात हो कि आनलाइन
बिजली बिलिंग व्यवस्था शुरू होने के बाद पावर कारपोरेशन ने उपकेंद्रों पर
भी बिलिंग के निर्देश दिए। उपकेंद्रों पर बिलिंग करने को कारपोरेशन के
निर्देश पर अतिरिक्त कक्ष बनाकर कंप्यूटर और सर्वर सहित अन्य सिस्टम भी
लगाए गए।
खंड कार्यालय और हर उपकेंद्र पर लाखों रुपये खर्च किए गए और कुछ
उपकेंद्रों पर स्थान का अभाव होने पर कारपोरेशन ने उपकेंद्र के परिसर में
एक अलग कक्ष तैयार कर काउंटर संचालित करने के निर्देश दिए। इतना ही नहीं
आनलाइन बिलिंग के दौरान इंटरनेट ठप होने की समस्या से दो चार न होना पड़े।
इसके लिए सभी उपकेंद्रों पर सर्वर लगाकर टावर भी लगा दिए गए और उपकेंद्रों
पर कंप्यूटर भी भेजे गए, पर सिटी उपकेंद्र व खंड कार्यालय द्वितीय को
छोड़कर अन्य किसी उपकेंद्र व खंड कार्यालय प्रथम पर अभी तक बिलिंग शुरू
नहीं हो सकी। बिल जमा करने के सीमित स्थान होने से उपभोक्ताओं को लंबी लाइन
लगानी पड़ती है।
उपकेंद्रों पर बिल जमा करने को तमाम तैयारियाें के बाद भी
बिलिंग प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। वहीं कंप्यूटरों का प्रयोग भी कुछ
स्थानों पर विभागीय फीडिंग को हो रहा, तो कुछ पर उपकरण शोपीस बने हुए हैं,
जबकि अफसरों की उदासीनता से लोगों को सुविधा नहीं मिल पा रही है।
उधर,
बिजली बिल जमा करने को उपकेंद्र और खंड कार्यालयों पर बिलिंग की तैयारी की
गई। उपकेंद्रों पर बिलिंग को उपकरण क्रय करने तथा अतिरिक्त कक्ष बनाने पर
तीन लाख रुपये तक व्यय हुए हैं। इनमें शहर के कोयल बाग कालोनी सहित अन्य दो
उपकेंद्र पर तो अलग से कक्ष बनाए गए हैं।
जबकि आशा नगर, सिटी उपकेंद्र,
गुरगुज्जा उपकेंद्र पर पहले से बने कक्षों की मरम्मत करवाकर उनमें काउंटर
तैयार किए गए हैं, जिससे कुल 18 लाख रुपये व्यय होने का अनुमान लगाया जा
रहा है। एक बिलिंग काउंटर पर लाखों रुपये व्यय होने पर भी स्थिति जस की तस
बनी हुई है और रुपयों का दुरुपयोग हुआ है।