हरदोई। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के निधन की खबर मिलने पर कांग्रेस नेताओं में शोक की लहर दौड़ गई। समाजसेवियों ने भी शोक व्यक्त किया। नारायण दत्त तिवारी का हरदोई से गहरा नाता रहा। वह कई बार हरदोई आए। हरदोई में कई लोगों से उनके पारिवारिक रिश्ते थे, जो अंत तक कायम रहे।
पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी आखिरी बार तीन फरवरी 2013 को यहां आए थे। वह अरुणा पार्क में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन्नालाल वैद्य की प्रतिमा का अनावरण करने आए थे। तब उन्होंने हरदोई से रिश्तों का जिक्र किया था और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के पुत्र रजनीकांत पांडेय से पुरानी मित्रता होने की बात भी कही थी। एक महिला सहयोगी के घर शाहाबाद भी गए थे। सिकंदपुर में सर्वोदय आश्रम में भी वह मुख्यमंत्री रहते हुए कई बार पहुंचे। आश्रम के संस्थापक स्व. रमेश भाई से उनकी नजदीकियां जगजाहिर रहीं।
वर्ष 1987 और 1988 में वह अक्सर ही सर्वोदय आश्रम आते थे। रमेश भाई की पत्नी और आश्रम का कार्य संभाल रहीं उर्मिला श्रीवास्तव बताती हैं कि 1988 में गर्मी के दिनों में वह जिले में तो सीधे सर्वोदय आश्रम पहुंचे थे। रात में लगभग एक बजे उन्होंने टडिय़ावां ब्लाक मुख्यालय का औचक निरीक्षण किया था। रात दो बजे आश्रम परिसर में जिले भर के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। बताया जाता है कि टड़ियावां विकास खंड में विनोबा भावे से प्रभावित होकर रमेश भाई ने 20 एकड़ क्षेत्रफल में ऊसर सुधार किया था। इसके बारे में जानकारी मिलने पर नारायण दत्त तिवारी हरदोई आए थे और काम का जायजा लिया था। प्रभावित होकर उन्होंने वर्ल्ड बैंक को प्रस्ताव भेजकर उत्तर प्रदेश में ऊसार सुधार के लिए आर्थिक सहयोग मांगा था। तब से शुरू ऊसर सुधार की योजनाएं अब भी चल रही हैं।
दिग्गज नेता स्व. धर्मगज सिंह से नारायण दत्त तिवारी के करीबी संबंध थे। पूर्व विधायक लालन शर्मा से भी करीबी रिश्ते थे। पूर्व में मंत्री रहे स्व. रामऔतार दीक्षित की गिनती भी तिवारी के करीबी लोगों में होती थी। बिलग्राम के पूर्व विधायक हरिशंकर तिवारी, दिग्गज कांग्रेसी रहे स्व. ओमनारायण त्रिवेदी नन्हें से भी नारायण दत्त तिवारी के अच्छे रिश्ते थे। रमेश भाई के छोटे भाई दिनेश श्रीवास्तव और वयोवृद्ध कांग्रेस नेता रजनीकांत पांडेय के पुत्र संजय पांडेय के विवाह समारोह में भी नारायण दत्त तिवारी शामिल हुए थे। पांच बार कांग्रेस अध्यक्ष व कई बार प्रमुख रहे ओम नारायण त्रिवेदी से भी पूर्व मुख्यमंत्री का गहरा नाता था। मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान वह दो बार उनके सिनेमा रोड स्थित आवास भी पहुंचे थे। स्व. ओम नारायण त्रिवेदी के पुत्र पिंटू त्रिवेदी ने बताया कि 1988 के दौरान वह उनके घर आए। चूंकि वह अपने पिता के साथ यहां से लेकर दिल्ली तक की दौड़ लगाते थे तो उन्हें बखूबी याद है कि वह दो से तीन माह में जिले की कांग्रेस का हाल भी उनसे फोन पर अक्सर लिया करते थे। उनके दिवंगत होने की सूचना पर पूरा परिवार शोकाकुल है।
पूर्व विधायक खालिद गौरी ने बताया कि वर्ष 1976-77 के दौरान इमरजेंसी लगी हुई थी। उस दौरान प्रत्येक जिलों में मंत्री दौड़ लगा रहे थे और पब्लिक से उनकी समस्याएं जानी जा रहीं थी। वह एक समाचार पत्र के संवाददाता भी थे और कांग्रेस से जुड़ चुके थे। उस दौरान पूरे जिले की शिकायत थी की कि यहां कागजों पर ही भूमि आवंटन हो रहा है। इसको उन्होंने प्रमुखता से प्रकाशित करवा दिया। प्रशासन नाराज हो गया और सांडी के आदमपुर व शाहाबाद के रेभामुरादपुर के प्रधानों के माध्यम से उन पर सरकार के खिलाफ भड़काने के आरोप में डीआईआर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया। उस वक्त वह तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के पास पहुंचे। व्यस्त रहने के कारण जब रात में 11 बजे वह कामकाज से फारिग हुए तो उस वक्त उन्होंने समय दिया और उसी दौरान संबंधित मंत्री, जिलाधिकारी और निदेशक सूचना से वार्ता कर इस मामले को सुलझाया।
पूर्व सांसद व विधायक धर्मगज सिंह के नाती कांग्रेस प्रदेश सचिव अजय सिंह ने बताया कि वर्ष 1987-88 में जब वह प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और उनके नाना धर्मगज सिंह सांसद थे तो उस दौरान लोनार का पुल व कानूनगो ट्रेनिंग सेंटर का शिलान्यास उन्हीं ने आकर किया था। इसके अलावा ट्रेनिंग सेंटर पर उन्होंने एक जनसभा भी की थी। वह उनके बाबू जी के समय में करीब छह बार उनके आवास आए।
- कई परिवारों से थे करीबी रिश्ते, अंत समय तक निभाए भी
अमर उजाला ब्यूरो