अमर उजाला ब्यूरो।
हरदोई। माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षा में सीसीटीवी कैमरों की अनिवार्यता में भी विद्यालय संचालकोें ने जुगाड़ ढूंढ ली है। विद्यालयों में कक्ष संख्या के सापेक्ष कैमरे न लगाकर सिर्फ खानापूर्ति की गई है। सेक्टर मजिस्ट्रेट की निरीक्षण आख्याओें में परीक्षा केंद्रों पर भारी खामियां मिली हैं। इससे सीसीटीवी कैमरे की उपयोगिता परीक्षा में कितनी कारगर साबित होगी, यह तो समय बतायेगा।
माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाने के निर्देश दिए थे। इसके तहत जिले में बनाए गए 174 परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की कवायद शुरू की गई थी। राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों को विद्यालय मद से और वित्त विहीन विद्यालयों को अपने पास से कैमरे लगाने थे। विभागीय निर्देशानुसार विद्यालय के सभी कक्षा में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने थे। लेकिन विद्यालय संचालकों ने उसकी जुगाड़ ढूंढ ली और विद्यालय के सभी कक्षों के स्थान पर कुछ कक्षों में कैमरे लगवा दिए और विद्यालय में कैमरे की उपलब्ध होने की सूचना विभाग को उपलब्ध करा दी।
जिलाधिकारी की ओर से सभी सेक्टर मजिस्ट्रेटों से स्थलीय निरीक्षण कराया गया, जिसमें अधिकतर विद्यालयों में सभी कक्षों में कैमरे लगे नहीं मिले । वही कई विद्यालयों में बिजली व्यवस्था तो कहीं पर नेट के सिग्नल नहीं पाए गए। इसके अलावा विद्यालयों में कंप्यूटर आपरेटर नहीं मिले और कहीं कप्यूटर सिस्टम भी ठीक नहीं पाया गया। इससे परीक्षा के दौरान कैमरों का प्रयोग कितना कारगर साबित होगा, इसकी हकीकत परीक्षा के दौरान ही पता चल सकेगी।
हरदोई। विभागीय सूत्रों की मानें तो कम कक्षों में कैमरे लगाने का कारण है कि अन्य कक्षों में क्या हो रहा है। इसकी जानकारी न हो सके और परीक्षा के दौरान अधिक विद्यार्थियों के आने पर उनको ऐसे कमरों में बिठाया जा सके । जिनमें कैमरे नहीं है। ताकि विद्यालय संचालकों का उद्देश्य हल हो सके।
- सेक्टर मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट में खुली हकीकत