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अविद्वानों की जहां होती पूजा, श्रेष्ठ कार्य भी होते निष्फल

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हरदोई। जहां विद्वानों का अपमान होता है, वहां श्रेष्ठ कार्य भी निष्फल हो जाते हैं। वेद मंदिर में मंगलवार से शुरू हुए चार दिवसीय यज्ञ में आहुतियां डालते हुए आचार्य त्रातादेव मिश्र ने ये बात कही।
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उन्होंने कहा कि उस ईश्वर की कोई प्रतिमा नहीं है। वह कण-कण में व्याप्त है। वह देहधारी नहीं हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि ईश्वर न तो जन्म लेता है और न ही मरता है। आचार्य ने कहा कि जो वेद के मार्ग को छोड़कर गलत रास्ते पर जाता है, उसका हृदय कपट से भरा होता है। इस दौरान रामबाबू सक्सेना, सुधा विद्या वाचस्पति ने यज्ञ में आहुतियां डालीं। मंजू सिंह, सदाप्यारी, विद्यादेवी, रामश्री, ऋचा श्रीवास्तव, उर्मिला सिन्हा, प्रताप नारायण अवस्थी, वीएस पांडे, अनिल मेहरोत्रा, सुजाना, प्रदीप आदि मौजूद रहे।
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