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Hapur News: गढ़ खादर के गांवों में कई घरों में घुसा पानी, ऊंचे मकानों में शरण लेने को मजबूर ग्रामीण

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खादर क्षेत्र में आवागमन के लिए नाव का सहारा लेते ग्रामीण। संवाद
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गढ़मुक्तेश्वर। गंगा का जलस्तर गढ़ खादर में कई गांवों के सैकड़ों परिवारों के लिए मुसीबत बन गया है। गांवों के बाहरी हिस्सों में मौजूद घरों में पानी भर गया है और ग्रामीण ऊंचे हिस्सों में दूसरे परिवारों के साथ शरण लेने के मजबूर हैं। इनका चूल्हा भी अलग घरों में जल रहा है। गांव कुदैनी की मढ़ैया, चकलठीरा, गड़ावली और काकाठेर की मढ़ैया में हालात अधिक खराब हैं। इनके संपर्क मार्ग पूरी तरह से डूब चुके हैं और रास्तों पर तीन से चार फिट तक पानी भरा हुआ है।
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रविवार शाम चार बजे तक बाढ़ नियंत्रण कक्ष अधिकारियों के अनुसार गढ़ क्षेत्र में गंगा का जलस्तर 198.77 मीटर (समुद्र तल से) दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटे में जलस्तर कुछ गिरावट जरूर आई है लेकिन हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। बिजनौर बैराज से पिछले 24 घंटे में करीब एक लाख क्यूसिक डिस्चार्ज किए जाने के कारण खादर क्षेत्र में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों को आशंका है कि पानी बढ़ने पर उनकी परेशानी फिर बढ़ सकती है।
फिलहाल गांव कुदैनी की मढ़ैया, चकलठीरा, गड़ावली और काकाठेर की मढ़ैया समेत आसपास के करीब आठ गांव अधिक प्रभावित हैं। इन गांवों में समस्या यह है कि गांव के संपर्क मार्गों पर चार फिट तक पानी है और बाढ़ का पानी गांवों के बाहरी हिस्सों में बने निचले मकानों तक पहुंच गया है। घरों के अंदर पानी घुसने से यहां रुकना संभव नहीं है, ऐसे में ग्रामीणों ने गांव के अंदर के हिस्सों में परिचितों के मकानों में शरण ली है और इनका चूल्हा-चौका भी यहीं हो रहा है।
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ग्रामीणों के अनुसार इसके अलावा खेतों और जंगलों में पानी भरा होने से पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है। गहरे पानी से होकर पशुओं को निकालना पड़ रहा है। वहीं, लगातार जलभराव और गंदगी के कारण ग्रामीण बुखार की चपेट में आ रहे हैं। गांवों के कई बुजुर्ग और बच्चे वायरल बुखार की चपेट में हैं और यह समस्या लगातार बढ़ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से खादर क्षेत्र में स्वास्थ्य शिविर लगवाने और बीमार लोगों की जांच कराने की मांग की है।
गड़ावली निवासी कुसुम का कहना है कि घर में पानी भरने के कारण रहना मुश्किल हो गया है। सामान को ऊंची जगह पर रखने के बाद भी काफी दिक्कत आ रही हैं। मजबूरी में पड़ोसी के घर में रहकर खाना बना रहे हैं। प्रशासन को जलभराव वाले घरों में रहने वाले परिवारों की मदद करनी चाहिए।


जलस्तर कम होने के बावजूद नहीं उतरा पानी

गांव के रास्तों और घरों में पानी भरा है। बच्चों, बुजुर्गों और पशुओं को गहरे पानी से निकालना पड़ रहा है। कई लोग बुखार से परेशान हैं, लेकिन गांव में अभी स्वास्थ्य जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। प्रशासन को तत्काल स्वास्थ्य शिविर लगाना चाहिए। मदन, चकलठीरा


पशुओं के लिए चारे का संकट, गहरे पानी से निकलने की मजबूरी

खादर क्षेत्र में जलभराव का असर पशुओं पर भी पड़ रहा है। खेत में पानी भरा होने से पशुपालकों के सामने हरे चारे का संकट खड़ा हो गया है। कई ग्रामीण चारा दूर से लेकर आ रहे हैं। पशुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए गहरे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। इससे पशुओं के फिसलने और चोटिल होने का खतरा भी बना है।


मेला रोड पर जलभराव से आवागमन प्रभावित

खादर क्षेत्र के मेला रोड पर अभी भी पानी बरकरार है। करीब एक दर्जन गांवों को जोड़ने वाले इस मार्ग पर जगह-जगह जलभराव होने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है। दोपहिया वाहन चालकों को विशेष दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर पानी लंबे समय तक जमा रहने से मार्ग खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है।


विधायक हरेंद्र सिंह तेवतिया और एसडीएम श्रीराम सिंह बाढ़ ग्रस्त गांवों में पहुंचे। जहां पर उन्होंने ग्रामीणों को शासन स्तर से आई राशन किटों का वितरण किया। विधायक ने कहा कि बाढ़ को रोक पाना किसी के वश में नहीं है लेकिन बाढ़ पीड़ितों की हर संभव मदद की जाएगी।


एसडीएम श्रीराम यादव का कहना है कि खादर क्षेत्र के करीब आठ गांवों में जलभराव की समस्या तो है, परंतु जलस्तर पहले से कम हुआ है। संभावना है कि दो से तीन दिन में पानी आबादी के पास से भी उतरना शुरू हो जाएगा। टीम के साथ गांवों में पहुंचकर हाल चाल जान रहे हैं। सभी संपर्क में हैं, किसी को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी।

खादर क्षेत्र में आवागमन के लिए नाव का सहारा लेते ग्रामीण। संवाद

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