मॉडल स्टेशनों में हापुड़ संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। स्टेशन पर 16 में से चार वाकी टाकी खराब होने और बाकी का सिग्नल नहीं मिलने से हादसे का भय बना रहता है। साथ ही रेलवे स्टेशन पर कर्मियों की संख्या भी कम है, जिससे कार्य में काफी परेशानी हो रही है।
हापुड़ रेलवे स्टेशन को मॉडल स्टेशन घोषित हुए काफी समय हो गया। स्टेशन पर 100 से अधिक ट्रेनें गुजरती हैं। साथ ही हजारों यात्री प्रतिदिन इस स्टेशन से अपने गंतव्य तक जाते हैं। लेकिन स्टेशन पर संसाधनों की कमी और स्टाफ का टोटा होने से रेलवे संचालन व अन्य कार्यों पर असर पड़ रहा है।
स्टेशन पर वाकी टाकी की कमी होने से कर्मी अंधेरे में भी झंडी दिखाकर ट्रेनों को रवाना कर रहे हैं। लगभग तीन वर्ष पूर्व हापुड़ स्टेशन पर रेलवे स्टाफ के लिए 16 वाकी टाकी दी गई थीं। इनमें से चार वाकी टाकी पूरी तरह खराब हो चुकी हैं।
इन वाकी टाकी का सिग्नल नहीं पकड़ने की शिकायत रहती है। ऐसे में वाकी टाकी का असर रेलवे संचालन पर पड़ रहा है। इतना ही नहीं हापुड़ से ट्रेन पर ड्यूटी करने वाले चालक व गार्ड ड्यूटी करने से दबी जुबान में मना कर रहे हैं। फिलहाल वाकी टाकी मिलती नजर नहीं आ रही है।
हापुड़ रेलवे स्टेशन पर रेलवे कर्मियों की संख्या की कमी है। रेलवे स्टेशन पर पांच स्टेशन मास्टर, 12 प्वाइंट मैन, दो टोकिन पार्टर, दो बाक्स पार्टर, दो कर्मी आरक्षित कार्यालय, दो कर्मी बुकिंग कार्यालय व पार्सल विभाग में एक कर्मी की कमी है।
स्टेशन अधीक्षक वीरेंद्र सिंह का कहना है कि रेलवे कर्मियों की संख्या बढ़ाने व वाकी टाकी की मांग को लेकर एक पत्र भेजा चुका है। लेकिन अभी तक मांग पूरी नहीं हुई है। बेहतर परिचालन देकर यात्रियों को सुविधा देना ही उनकी प्राथमिकता है।