एक्सिडेंट के बाद गई थी प्रशांत की जान
गांव माधापुर निवासी प्रशांत (22) एक अप्रैल को पुराने बाइपास पर अज्ञात वाहन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पुलिस ने उसे तत्काल स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया, जहां हालत गंभीर होने पर उसे मेरठ रेफर कर दिया गया। मेरठ में उपचार के दौरान तीन अप्रैल को युवक की मौत हो गई। मृतक की पहचान के लिए 72 घंटे तक प्रयास किए गए, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। इसी बीच चार अप्रैल को मृतक के पिता ऋषिपाल ने थाने पहुंचकर अपने बेटे प्रशांत की गुमशुदगी दर्ज कराई, लेकिन इसके बावजूद पुलिस मृतक की शिनाख्त नहीं कर सकी। जिसके बाद पुलिस ने लापरवाही करते हुए प्रशांत का अंतिम संस्कार कर दिया।
माता-पिता नहीं देख पाए बेटे का चेहरा
शुक्रवार को जब परिजनों को पता चला कि उनके बेटे का अंतिम संस्कार पहले ही किया जा चुका है, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ परिजन थाने पहुंच गए और सड़क पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की गई और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। मौके पर पहुंचे सीओ स्तुति सिंह और इंस्पेक्टर सुरेश कुमार ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।
दो दरोगा निलंबित
काफी देर तक चली नोकझोंक के बाद सीओ ने पूरे मामले की जानकारी एसपी ज्ञानंजय सिंह को दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने तुरंत प्रभाव से दरोगा गोविंद सिंह और विकेश कुमार को निलंबित कर दिया। कार्रवाई की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण शांत हुए और जाम खोल दिया गया। इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे क्षेत्र में रोष व्याप्त है।
परिजनों को बिना शव दिखाए कराया अंतिम संस्कार
परिजनों का कहना है कि यदि पुलिस तत्परता के साथ शिनाख्त करती तो बेटे को सही उपचार दिलाते, लेकिन पुलिस की लापरवाही के कारण बेटे को न तो सही उपचार मिला, न ही उसका अंतिम बार चेहरा देख सके, परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।