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गंगा में गिर रहे दूषित पानी पर रोक की बंधी आस

Mon, 27 Feb 2017 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/हापुड़
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नदी - फोटो : अमर उजाला
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फैक्ट्रियों में ईटीपी की अनिवार्यता लागू होने की कवायद से गंगा में गिर रहे दूषित और जहरीले पानी पर प्रभावी ढंग में रोक लगनी संभव होगी, तीन महीने बाद कोई भी फैक्ट्री ईटीपी के बिना संचालित नहीं हो पाएगी।
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सर्वोच्च अदालत ने आम लोगों की जिंदगी को बेहद अहम बताते हुए राष्ट्रीय स्तर पर संचालित हो रहीं फैक्ट्रियों से होकर वैकल्पिक नालों के माध्यम से नहर और नदियों में गिर रहे जहरीले पानी पर कड़ी नकेल कसने को कदम उठाया है।

चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्य बैंच ने प्राथमिक औद्योगिक प्रवाह शोधन यंत्र (ईटीपी) के बिना चलने वाली फैक्ट्रियों पर पूरी तरह रोक लगाने के साथ ही उनकी बिजली सप्लाई काटने का भी आदेश दिया है। फैक्ट्रियों को ईटीपी लगवाने के लिए तीन महीने की मोहलत दी गई है।
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अगर कोई फैक्ट्री ईटीपी नहीं लगवा पाती है, तो उनको नोटिस जारी करने और ईटीपी न लगने पर सख्ती के साथ बंद कराने का आदेश दिया है। बता दें कि सिंभावली, स्याना और गजरौला की दर्जनों फैक्ट्रियों का लाखों लीटर जहरीला पानी नालों से होकर गंगा में गिरता है।

इक्का-दुक्का फैक्ट्रियों के अलावा अन्य सभी ईटीपी के बिना संचालित हो रही हैैं। रात में गंदे पानी को साफ किए बिना ही नालों के माध्यम से गंगा में बहा देती हैं। ईटीपी में गंदा पानी साफ करने में काफी लागत आती है।

सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े आदेश के बाद अब ऐसा कर पाना मुमकिन नहीं होगा। इससे गढ़, ब्रजघाट, पूठ और गजरौला गंगा में प्रतिदिन गिरने वाले लाखों लीटर जहरीले पानी पर रोक लगने की आस बंधी है।

सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने सराहा
तीर्थ पुरोहित पंडित बिल्लू शर्मा का कहना है कि गंगा सफाई की योजना तो चलती हैैं, लेकिन फैक्ट्रियों समेत आबादी से होकर गिरने वाले दूषित पानी पर रोक की कोई व्यवस्था नहीं की जाती है। अब सुप्रीम कोर्ट का सराहनीय कदम गंगा प्रदूषण की रोकथाम में बेहद अहम कड़ी साबित होगा।

पंडित पवन कहते हैं कि जिस दिन फैक्ट्रियों और आबादी से होकर गिरने वाले दूषित पानी पर रोक लग जाएगी, उसी दिन से गंगा की जलधारा फिर से निर्मल होनी प्रारंभ हो जाएगी।

पंडित मुकेश गुरु का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सिंभावली, स्याना और गजरौला की फैक्ट्रियों का दूषित और जहरीला पानी गंगा में नहीं गिर पाएगा, जिससे जलीय जीव जंतुओं के अस्तित्व पर मंडराता आ रहा खतरा भी स्वत: ही दूर हो जाएगा।

पंडित राजकुुमार लालू कहते हैं कि सचमुच सुप्रीम कोर्ट का आदेश एक सराहनीय और स्वागत योग्य कदम है, क्योंकि इससे गंगा में गिर रहे दूषित पानी पर पूरी तरह रोक लगने के साथ ही उन नेताओं को भी सीख मिलेगी जो गंगा की साफ सफाई की दुुहाई देकर वोट तो बटोरते हैं।
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