हापुड़। प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण नाक, कान और गले के रोगी बढ़ गए हैं। गले में खराश के साथ जख्म बन रहे हैं। सीएचसी और जिला अस्पताल में रोजाना ऐसे 150 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। वायरल, त्वचा रोग, पेट संक्रमण के मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है।
जिला अस्पताल की ईएनटी डॉ.मोहिनी सिंह ने बताया कि बदलते मौसम में गला, कान का संक्रमण बढ़ रहा है। खान पान और मौसम के प्रति सचेत नहीं रहने वाले मरीजों में असर अधिक है। कान में दर्द की समस्या लेकर हर रोज मरीज आ रहे हैं, इनमें बच्चे सबसे अधिक है। इसके अलावा घरघराहट, तेज खांसी, बुखार, गले में खराश जैसे लक्षण सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले रोजाना ओपीडी में 100 से अधिक मरीज आते थे, लेकिन इन दिनों 150 से अधिक आ रहे हैं। फिजिशियन डॉ.अशरफ अली ने बताया कि अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, गले के इंफेक्शन और सांस लेने में परेशानी वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. समरेंद्र राय ने बताया कि इस मौसम में बच्चों में उल्टी दस्त की समस्या बढ़ी है। पेट में दर्द की समस्या सबसे अधिक आ रही है। निमोनिया के मामले भी अब आने लगे हैं। इस मौसम में बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की जरूरत है।
बचाव के लिए ये उपाय अपनाएं
* घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनें या रूमाल से नाक-मुंह ढक लें।
* छोटे बच्चे, बुजुर्ग और सांस रोगी सुबह और शाम बाहर जाने से बचें।
* गुनगुने पानी से गरारे और गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें।
* दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं ताकि गले की सूजन कम हो।
* घर के अंदर हवा शुद्ध करने वाला उपकरण या पौधे रखें।
* धूल मिट्टी से बचें, घर की सफाई नियमित करें।
* सांस लेने में दिक्कत, लगातार खांसी, तेज बुखार या गले में दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।