देश-विदेश में विख्यात हापुड़ का बर्तन कारोबार नोटबंदी की भेट चढ़ गया है। पिछले 43 दिन के अंदर एक अरब का कारोबार प्रभावित होने से कसेरठ बाजार की रीढ़ टूट गई है। 28 बड़े कारखानों से 80 फीसदी लेबर हट चुके हैं।
साथ ही 200 छोटे कारखाने व पॉलिस अड्डे भी लगभग ठप होने के कगार पर हैं। स्टील बर्तनों के लिए हापुड़ का कसेरठ बाजार की विदेशों तक में धूम है। नोटबंदी से पूर्व इस बाजार में रोजाना करीब तीन करोड़ रुपये का कारोबार होता था।
बर्तनों की जबरदस्त डिमांड के चलते शहरभर में 28 बड़े कारखाने लगे हुए हैं, इनके अलावा करीब 200 छोटे कारखाने और पॉलिस अड्डे भी बर्तनों की चमक को बनाए हुए हैं। नोटबंदी की घोषणा के बाद कसेरठ बाजार अपनी ख्याति को खोता जा रहा है।
आलम यह है कि 43 दिन में कसेरठ बाजार में करीब 1.20 अरब रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। बेहद भीड़ भाड़ वाले इस बाजार में दुकानदार व कारोबारी व्यापार चौपट होने की बात कहते मिले। दिनदहाड़े बाजार में पसरा सन्नाटा कसेरठ बाजार के बदहाली की दास्ता बयां कर रहा था।
नोटबंदी के बाद से बर्तन कारोबार में 80 फीसदी तक गिरावट आई है। बर्तनों का ऑर्डर नहीं मिल पा रहा है, बैंकों से पर्याप्त कैश नहीं मिलने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। - नरेश अग्रवाल, बर्तन करोबारी व व्यापारी नेता
नोटबंदी के चलते जिले में करीब 1.20 अरब का कारोबार प्रभावित हुआ है। कैश नहीं मिलने के कारण 80 फीसदी लेबर वापस लौट गए हैं। ऐसे में घर का खर्च चलाना भी मुश्किल होने लगा है। कुणाल जैन, बर्तन कारोबारी व कारखाना संचालक
नोटबंदी ने बर्तन कारोबार को हिला कर रख दिया है। कारखानों में 80 फीसदी काम कम हो गया है, लेेबर रुकने को तैयार ही नहीं है। काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गोविंद अग्रवाल, कारखाना संचालक
बैंकों से स्वाइप मशीन न मिलने के कारण भी परेशानी हो रही है। ग्राहक अब कार्ड से भुगतान करना चाह रहे हैं, बैंकों में मशीन के लिए आवेदन कर चुके हैं। - अनिल कुमार, बर्तन विक्रेता