हापुड़ के मास्टर प्लान को झटका लगा है। करीब डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी मास्टर प्लान 2021 शासन से स्वीकृत होकर नहीं लौटा, जबकि मंडलायुक्त अब तक कई रिमाइंडर भेज चुके हैं। अब प्राधिकरण के नामित सदस्यों ने इस मामले को प्राधिकरण की आगामी बोर्ड बैठक में उठाने का निर्णय लिया है।
हालांकि गढ़मुक्तेश्वर के जोनल प्लान को लेकर शासन में दो जून को बैठक होगी, जिसकी प्राधिकरण के अधिकारियों ने तैयारी कर ली है। इस प्लान के स्वीकृत होने से गढ़मुक्तेश्वर के विकास की गति को पंख लग जाएंगे।
हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण का मास्टर प्लान हापुड़ जिला बनने से पहले 2009-10 में तैयार किया गया था। तमाम औपचारिकताओं के बाद इसे एनसीआर बोर्ड की स्वीकृति के लिए भेजा गया था।
लेकिन इसी बीच 28 सितंबर वर्ष 2011 में हापुड़ जिले की घोषणा हो गई। इस पर एनसीआर बोर्ड के अधिकारियों ने यह आपत्ति लगाकर मास्टर प्लान वापस कर दिया कि सरकारी दफ्तर और आवास भी इसमें चिंह्ति किए जाएं। इस प्रक्रिया में भी कई वर्ष लग गए।
इसके बाद एनसीआर बोर्ड से स्वीकृति मिली तो आपत्तियों के निस्तारण के बाद मास्टर प्लान शासन की स्वीकृति के लिए भेजा गया जो मंडलायुक्त के दो बार रिमाइंडर भेजे जाने पर स्वीकृत होकर नहीं लौटा।
इसी के साथ गढ़मुक्तेश्वर का जोनल प्लान भी वहां लंबित है। प्राधिकरण के नामित सदस्य संजय यादव, इमरान और मुकेश जैन का कहना है कि इस मामले को प्राधिकरण बोर्ड की अगली बैठक में जोरशोर से उठाया जाएगा।
इतना ही नहीं जरूरत पड़ी तो लखनऊ जाकर शासन में बात करेंगे। उधर, प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता नीरज गुप्ता ने बताया कि गढ़मुक्तेश्वर के जोनल प्लान पर विचार विमर्श करने के लिए दो जून को शासन में बैठक होगी।
इसके लिए प्राधिकरण के अधिकारियों ने तैयारी पूरी कर ली है। अगर यह जोनल प्लान स्वीकृत हो गया तो गढ़मुक्तेश्वर और ब्रजघाट क्षेत्र में तेजी से विकास होगा।