दहेज में आल्टो कार की बजाय बोलेरो मांगने वाला दूल्हा और उसके परिजन बीस घंटे बाद लड़की पक्ष के बंधन से मुक्त हो सके। गांव में रातभर चली पंचायत विफल होने के बाद मामला थाने में पहुंच गया था।
वहां पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों में सहमति बनने के बाद दूल्हा और उसके परिजनों को छोड़ा गया। पुलिस के अनुसार जनपद मेरठ के किठौर थानाक्षेत्र के गांव बहरोड़ा से एक युवक की बारात रविवार को सिंभावली क्षेत्र के गांव हिम्मतपुर में आई थी।
वहां नाश्ते-खाने और पूरी आव भगत होने के बाद निकाह की तैयारी चल रही थीं। इस दौरान दूल्हे के पिता ने दहेज में आल्टो की बजाए बोलेरो मांगने पर बात बिगड़ गई थी। जिस पर ग्रामीणों समेत लड़की पक्ष ने
बस में तोड़फोड़ कर बारातियों समेत दूल्हा और उसके परिजनों को बंधक बना लिया था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बारातियों को तो मुक्त करा दिया था, लेकिन दूल्हा और उसके परिजनों को ग्रामीणों ने नहीं छोड़ा था।
सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में लड़का और लड़की पक्ष के बीच रातभर बातचीत होती रहीं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। जिस पर सोमवार सुबह पुलिस दोनों पक्षों को थाने ले आई, वहां फिर से बातचीत का दौर शुरू हुआ।
दोपहर करीब तीन बजे दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बन गई। इसके तहत दोनों पक्ष एक-दूसरे का सामान, जेवर और उपहार लौटाने पर राजी हो गए।
जबकि लड़की पक्ष द्वारा रिश्ते समेत बारात के खानपान पर खर्च की गई रकम वापस लौटाने पर लड़का पक्ष सहमत हो गया। तब कहीं जाकर ग्रामीणों की देखरेख में बंधक बने दूल्हे और उसके परिजनों को करीब 20 घंटों बाद मुक्त किया गया।
इंस्पेक्टर हरशरण शर्मा का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच आपसी रजामंदी बनने पर मामला किसी भी कार्रवाई के बिना निपट गया है।