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Hapur News: गंगा में दिवंगतोंं के नाम दीपदान कर नम हो गई अपनों की आंखें

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गढ़मुक्तेश्वर। पिछले दस दिन से चल रहे कार्तिक पूर्णिमा मेले में बृहस्पतिवार को चतुर्दशी का पर्व मनाया गया। यहां पर दीपदान करने वाले श्रद्धालु भारी संख्या में पहुंचे। सूर्यास्त होने के बाद से गंगा किनारे कच्चे घाट, ब्रजघाट और पूठ में 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दीपदान किया।
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कार्तिक पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए दीपदान करने की परंपरा महाभारत कालीन है। महाभारत युद्ध के बाद भगवान श्रीकृष्ण के परामर्श पर पांडवों ने अपने सगे-संबंधियों, कौरवों और युद्ध में मारे गए योद्धाओं, वीर सैनिकों की आत्मा की शांति के लिए गढ़ क्षेत्र में ही गंगा तट पर रहकर सात दिन तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान कर चतुर्दशी पर दीपदान किया था, तभी से यह परंपरा चली आ रही है।

साल भर में मृतकों के परिजनों की भीड़ गंगा के तट पर उमड़ी, जिन्होंने शाम का धुंधलका होने के साथ ही दीपदान करना शुरू कर दिया। पटेरे से तैयार किए गए आसन पर रखे गए दियों की रोशनी से ऐसा प्रतीत होने लगा मानो आसमान में टिमटिमाने वाले तारे जमीन पर उतर आएं हैं। वहीं, इस दौरान हमेशा के दूर जा चुके पिता, भाई, माता, दादी-दादा व अन्य प्रियजनों के लिए जब उनके अपनों ने दीपदान किया तो उनकी आंखों में आंसू भर आए, साथ आएं लोग उन्हें हिम्मत बंधाते नजर आए। शाम होते ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। यहां श्रद्धालुओं की भीड़ गंगा तटों पर दूर तक नजर आने लगी। मुख्य चुनाव आयुक्त, गढ़ नगर निवासी चौधरी मदन पाल, रोहित शर्मा अपने दिवंगत पिता की आत्मा की शांति को दीपदान करने पहुंचे। वहीं हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली के साथ ही पश्चिमी उप्र के 10 लाख से अधिक लोगों ने दीपदान किया।
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