नए साल में गढ़ में बहेगी विकास की गंगा
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नए साल पर गंगा नगरी में पहली आवासीय कालोनी का सपना परवान चढे़गा। अधिग्रहित भूमि पर चल रहे विवाद को सुलझाने के बाद एचपीडीए के अफसर इस वर्ष गंगाधाम योजना के तहत निर्माण कार्य शुरू कराने का दावा कर रहे हैं। बता दें कि, गंगाधाम योजना के तहत गढ़ में पुरानी दिल्ली रोड स्थित 34.153 हेक्टेयर भूमि में आवासीय कालोनी विकसित की जानी थी। कभी किसानों के विरोध तो कभी सरकारी महकमों की शिथिलता से 15 वर्ष से योजना को गति नहीं मिल सकी।
गौरतलब है कि 2001 में हरिद्वार के उत्तराखंड में शामिल होने के बाद प्रदेश सरकार ने गढ़-ब्रजघाट को विकसित करने की घोषणा की थी। इसके तहत गढ़ में आवासीय कालोनी विकसित कराने की योजना भी तैयार की गई थी। मौजूदा सरकार ने सबसे पहले विकास का जिम्मा गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को सौंपा था। गढ़ में परिक्रमा पथ और ब्रजघाट में विशालकाय घंटाघर समेत इक्का-दुक्का सड़कों का निर्माण कराने के बाद जीडीए ने धनाभाव का राग अलापना शुरू कर दिया था।
बाद में 1996 में हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण बनने के बाद शासन ने गढ़-ब्रजघाट से जुड़ी विकास योजनाओं को अमलीजामा पहनाने का जिम्मा जीडीए से वापस लेकर एचपीडीए को सौंप दिया। बाद में बाजार रेट से काफी कम होने पर किसानों ने अधिग्रहित भूमि का मुआवजा लेने से इंकार कर दिया और वह हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने एचपीडीए को बाजार भाव के अनुसार मुआवजा राशि तय करने का निर्देश दिए थे।
तब से लेकर अब तक एचपीडीए के अफसर मुआवजे को लेकर चल रहे गतिरोध को सुलझाने में कामयाब नहीं हो पाए। अब अफसरों का दावा है कि नए सिरे से किसानों को मनाने की कवायद चल रही है, इसके बाद जल्द ही पुरानी दिल्ली रोड किनारे 34.153 हेक्टेयर भूमि में गंगाधाम योजना के तहत काम शुरू कराया जाएगा। एचपीडीए के सचिव विश्वजीत राय ने बताया कि किसानों के मुआवजे से जुड़े मामले का निस्तारण कराने के बाद बहुत जल्द गंगाधाम योजना का निर्माण कार्य चालू कराया जाएगा।
वहीं, पालिका चेयर पर्सन संगीता पुरुषोत्तम और ईओ पूर्णिमा सिंह का कहना है कि नए साल में ब्रजघाट तीर्थनगरी को क्लीन और ग्रीन बनाने में भी कोई भी कोताही नहीं होने दी जाएगी। एसडीएम आरएन पांडेय का कहना है कि नए साल में जनहित से जुड़ीं विकास योजनाओं को अपेक्षित स्तर पर गति दिलाई जाएगी।