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Hapur News: काली नदी किनारे 47 करोड़ रुपये से बनेगा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट

Thu, 04 Sep 2025 10:49 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
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हापुड़। काली नदी और गंगा के स्वच्छ बनाने के लिए तातरपुर क्षेत्र में काली नदी के किनारे 47 करोड़ की लागत से चार हजार वर्ग मीटर भूमि पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जाएगा। जल निगम ग्रामीण ने इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली है। अब बारिश थमने के तुरंत बाद निर्माण शुरू होगा।
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पिछले करीब तीन साल से प्लांट के निर्माण के लिए कई स्तर पर प्रक्रियाएं चल रही थीं। वहीं, करीब एक साल से टेंडर प्रक्रिया जारी थी। विभाग की ओर से छह माह बाद टेंडर को तकनीकी स्वीकृति मिली है। इसके बाद गाजियाबाद की एसकेसी फर्म को निर्माण और संचालन का टेंडर मिला है। इस प्लांट के जरिए जल निगम ग्रामीण फैक्टरी और नालों के पानी को ट्रीट कर उसे गंगा नदी में डालेगा।

जल निगम ग्रामीण के अधिशासी अभियंता विनय रावत का कहना है कि काली नदी और गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए जो प्लांट ततारपुर में लगेगा, इसमें हर दिन छह लाख लीटर पानी को ट्रीट किया जाएगा। प्लांट के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। बारिश बंद होते ही इसी माह के अंत में काम शुरू कराने का प्रयास है।
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कासगंज में जाकर गंगा में मिलता है पानी

काली नदी का उद्गम मुजफ्फरनगर के खतौली से हुआ है। यहां से नदी मेरठ से हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़ होते हुए कासगंज में गंगा में जाकर गिरती है। सबसे अधिक परेशानी यह है कि अभी इस नदी में नालों व फैक्टरियों का पानी ततारपुर में गिरता है। इसके कारण काली नदी का पानी गंगा को भी दूषित करता है, जबकि गंगा की शुद्धता के लिए उसकी सहायक नदियों के पानी का ट्रीटमेंट आवश्यक है।



बारिश के कारण शुरू नहीं हुआ काम

जल निगम ग्रामीण के अधिशासी अभियंता विनय रावत का कहना है कि जुलाई के मध्य से लगातार रुक-रुककर बारिश हो रही है। इस कारण विभाग व संबंधित फर्म के अधिकारी खुदाई आदि का कार्य पूरा नहीं कर पा रहे हैं, जबकि जमीन की सफाई पूर्व में कराई जा चुकी है।



दूषित पानी से बीमार पड़ रहे ग्रामीण

फैक्टरियों का पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के काली नदी में गिरता है। यह केमिकल युक्त पानी जमीन में भी जाता है। इसके कारण आसपास के करीब 20 गांवों के ग्रामीण दूषित पानी पीकर बीमार पड़ रहे हैं। प्रदूषण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रतिदिन काली नदी में करीब 117 औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी गिर रहा है। दूषित पानी के कारण गांव असरा, मुरादपुर, मतनौरा, मलकपुर, बिगास, गजालपुर, बाबूगढ़ छावनी, लालपुर, ततारपुर आदि गांवों में ग्रामीण हेपेटाइटिस, कैंसर, पेट संक्रमण व अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं।
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