उड़द की खेती ने इस बार किसानों की कमर तोड़ दी है। तीन महीने तक जी जान से सिंचाई, नलाई के बाद अब किसानों को यह फसल खेत में ही जोतनी पड़ रही है। वजह, तीन महीने के बाद भी फसल में फली नहीं आई। रसूलपुर के किसानों ने जब खेतों में खड़ी फसल जोती तो उनकी आंखें छलक पड़ीं।
मिट्टी और बीज आदि की जांच करना तो दूर कृषि विभाग के अधिकारी फसल का निरीक्षण करने भी नहीं आए। इससे किसानों में गुस्सा है। जिले के करीब 800 हेक्टेयर रकबे में उड़द की फसल की बुवाई की गई थी। बीते दिनों हुई बारिश,
तापमान में उतार चढ़ाव और बीमारी के चलते तीन महीने बीतने के बाद भी फसल में फली नहीं बन रही थी। जबकि तीन महीने की अवधि में फसल तैयार हो जाती है। गन्ना भुगतान न मिलने पर भी किसानों ने कर्ज लेकर फसल में दवाएं आदि भी डालीं,
लेकिन नतीजा बेअसर रहा। हजारों रुपये खर्च के बाद भी फली नहीं आने से किसान मायूस हो गए हैं। शनिवार को गांव रसूलपुर के ग्रामीणों ने जब अपनी फसल को जोतना शुरू किया तो उनकी आंखें भर गईं।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी सतीश मलिक ने बताया कि बीते दिनों हुई बारिश से उड़द की फसल पर बने फूल खत्म कर दिए थे। इसकी वजह से फसल में फली नहीं आई।
कृषि विभाग के अफसरों की इस लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर प्रशासनिक अफसरों से वार्ता की जाएगी। राहत नहीं मिलने पर आंदोलन भी किया जाएगा। धनवीर शास्त्री, जिलाध्यक्ष, भाकियू
फसल जोतने के विषय में मुझे कोई जानकारी नहीं है। फसलों का निरीक्षण किया जाएगा। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। किसानों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। शिवकुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी