हापुड़। सिखैड़ा में करीब तीन करोड़ से बने ट्रॉमा सेंटर में पर्याप्त स्टाफ और संसाधन नहीं होने से गंभीर रूप से घायल हुए मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा। यहां सिर्फ ओपीडी ही चल रही है, जबकि यह सेंटर स्वास्थ्य विभाग के हैंडओवर हो चुका है। मजबूरी में मरीजों को निजी अस्पतालों में भर्ती होना पड़ता है।
जिले के सरकारी अस्पतालों में गंभीर रोगियों के उपचार की कोई सुविधा नहीं है। ऐसे मरीजों को तुरंत ही रेफर किया जाता है। ऐसे में तीमारदार मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती कराते हैं, जहां महंगे बिल से मरीज के परिजनों पर आर्थिक बोझ पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग ने सिखैड़ा में ट्रॉमा सेंटर बनाया हुआ है। कार्यदायी संस्था ने इसे स्वास्थ्य विभाग के हैंडओवर भी कर दिया है, लेकिन सृजित पदों के सापेक्ष दस फीसदी स्टाफ भी नहीं मिल सका है। जिले में पहले से ही नियुक्त तीन चिकित्सकों को ट्रॉमा सेंटर भेजा गया है। इस कारण सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी हो गई है। यहां सिर्फ ओपीडी चल रही है, अगर कोई दुर्घटना में घायल मरीज आता है, तो उसका उपचार नहीं हो पाता।
ट्रॉमा सेंटर में सृजित पदों की स्थिति-
चिकित्सक स्वीकृत पद
ऑर्थो 02
एनेस्थिशिया 02
जनरल सर्जन 02
ईएमओ 03
स्टाफ नर्स 15
ओटी टेक्नीशियन 03
एक्सरे टेक्नीशियन 03
लैब टेक्नीशियन 02
नर्सिंग अटेंडेंट 09
चतुर्थ श्रेणी 09
कोट -
ट्रॉमा सेंटर में उपचार सेवा शुरू हो गई है। सभी संसाधनों की व्यवस्था कराई जा रही है। स्टाफ की नियुक्ति शासन से होनी है, इस संबंध में पत्राचार किया जा रहा है। - डॉ. सुनील त्यागी, सीएमओ।