हापुड़। श्री रामलीला समिति की ओर से आयोजित श्रीरामलीला महोत्सव में सोमवार को श्रीराम वनवास यात्रा श्रद्धा और भक्ति के साथ निकाली गई। यात्रा के दौरान भगवान श्रीराम के त्याग, तपस्या, कर्तव्यनिष्ठा और मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप का संदेश दिया गया।
समिति के अध्यक्ष विनोद कुमार वर्मा और महामंत्री उमेश अग्रवाल ने कहा कि श्रीराम वनवास का प्रसंग रामायण के सबसे भावुक और प्रेरणादायी प्रसंगों में शामिल है। पिता महाराज दशरथ के वचन की मर्यादा बनाए रखने के लिए भगवान श्रीराम ने राजमहल के सुखों का त्याग कर 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया था। माता सीता और अनुज लक्ष्मण का उनके साथ वन जाना त्याग, समर्पण, पारिवारिक प्रेम और धर्म के प्रति अटूट निष्ठा का अनुपम उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, व्यक्ति को सत्य, धर्म और कर्तव्य के मार्ग से विचलित नहीं होना चाहिए। उनके आदर्श आज भी समाज को सही दिशा दिखाने का काम करते हैं।
यात्रा के संयोजक नवीन गुप्ता ने कहा कि श्रीरामलीला महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संस्कारों और आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके जरिए समाज में नैतिकता, आपसी सद्भाव और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। कोषाध्यक्ष शुभम गोयल ने कहा कि भगवान श्रीराम का वनवास सिखाता है कि महानता पद और प्रतिष्ठा में नहीं, बल्कि त्याग, वचनबद्धता और कर्तव्यपालन में निहित है।
इस अवसर पर देवेंद्र कुमार, रविंद्र गुप्ता, सुयश वशिष्ठ, विमल वर्मा, प्रदीप सोनी, अंकुर गर्ग, रितिक त्यागी, गौरव आदि मौजूद रहे।