जिले में मतदान कर्मचारियों की कमी पूरी करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। डिमांड के बाद बाहरी जिलों से कर्मचारियों के न पहुंचने पर प्रशासन ने अब प्राइवेट कर्मचारियों की भी ड्यूटी मतदान में लगानी शुरू कर दी है।
दूसरी ओर प्रशिक्षण में न पहुंचने पर कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। हापुड़ एक नवसृजित जिला है। ऐसे में यहां अभी संसाधनों का अभाव है। जिले में मतदान के लिए कुल 917 बूथ बनाए गए हैं। इन पर चार गुना कर्मचारियों के हिसाब से 3668 कर्मचारियों की आवश्यकता है।
इसके अलावा 390 माइक्रो ऑबजर्वर, 190 ब्राडकास्टिंग कर्मचारी, 95 सेक्टर मजिस्ट्रेट और 30 जोनल मजिस्ट्रेट पर चुनाव को संपन्न कराने की जिम्मेदारी है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों को बूथों पर ड्यूटी के लिए कर्मचारियों की कमी पूरी करने में पसीने छूट रहे हैं।
दरअसल, प्रशासन ने मेरठ और बुलंदशहर से करीब छह सौ कर्मचारियों को ड्यूटी के लिए डिमांड भेजी थी, लेकिन अधिकतर कर्मचारी यहां प्रशिक्षण के लिए नहीं पहुंचे। हालांकि इन कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है।
इस कमी को पूरी करने के लिए प्रशासन को प्राइवेट कर्मचारियों का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रशासन ने जिले की मोनाड विश्वविद्यालय, दूसरे इंस्टीट्यूट आदि से कर्मचारियों की भरपाई करना शुरू कर दिया है।
उप निर्वाचन अधिकारी रजनीश राय ने बताया कि कर्मचारियों की कमी को पूरी कर लिया जाएगा। जो कर्मचारी अनुपस्थित हैं उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।