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शिवरात्रि : भोर में ही खुलेंगे कपाट, पूरे दिन जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त

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रात के समय तहसील चौराहे से झांकी वाली कांवड़ लेकर गुजरते शिवभक्त। संवाद
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हापुड़। शिवरात्रि से पूर्व शहर ही सड़कें केसरिया रंग में रंगी रही और बोल बम के उद्घोष गूंजते रहे। कांवड़ यात्रा में आस्था के साथ युवाओं के जोश का रंग भी खूब चढ़ा रहा। पैदल कांवड़ के साथ डाक कांवड़ियों ने भी रफ्तार पकड़ी और सड़कों पर दिनभर डाक कांवड़ दिखाई दी। हरिद्वार, गंगोत्री, ब्रजघाट से गंगाजल लेकर आ रहे लाखों कांवड़िये रात तक शिवालयों में पहुंच गए। मंगलवार को शिवरात्रि पर सुबह 5:50 बजे से शिवालयों में भगवान शिव का जलाभिषेक होगा। पूरे दिन जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त है।
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शिवरात्रि से एक दिन पहले कांवड़ मार्ग पूरी तरह शिवमय रहा। कांवड़ियों में मंजिल तक पहुंचने की होड़ मची रही। शहर के मेरठ रोड, गढ़ रोड, बुलंदशहर रोड, दिल्ली रोड हर ओर बाबा के जयकारों की गूंज सुनाई दी। कांवड़ियों ने पैरों में दर्द और छाले की परवाह किए बिना शिवालयों की ओर तेजी से कदम बढ़ाया।
डीजे पर बजते शिव भजनों पर झूमते हुए तेजी से मंजिल की ओर बढ़ रहे थे। झांकी कांवड़ और डीजे देखने के लिए दिनभर सड़कों पर शिव भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। झांकी कांवड़ में शिव परिवार, श्री राम-सीता के दर्शन कर भक्तों ने आशीर्वाद लिया।
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कांवड़ सेवा शिविरों में भी भक्तों ने हरिद्वार, गंगोत्री, ब्रजघाट से युवाओं के साथ ही महिलाएं और बच्चे भी कांवड़ लेकर तेजी से शिवालयों की ओर कदम बढ़ा रहे थे। देर शाम तक अधिकांश कांवड़िये अपनी मंजिल तक पहुंच गए।

डाक कांवड़िये भी एक-दूसरे को गंगाजल पकड़ाते हुए दिनभर सड़कों पर दौड़ लगाते नजर आए। तेज गति से दौड़ते डाक कांवड़ के वाहन और उनके पीछे चल रहे शिव भक्तों के जत्थों से मार्ग पर हलचल बनी रही। डाक कांवड़िये कम समय में गंतव्य तक पहुंचने के लिए तेज रफ्तार से आगे बढ़ते दिखाई दिए।


सुबह 4:54 बजे से शुरू होगी चतुर्दशी

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 11 अगस्त को सुबह 4:54 बजे से प्रारंभ होगी, जिसका समापन 12 अगस्त को देर रात 1:53 मिनट पर होगा। शिवालयों में सुबह 5:50 बजे से कांवड़ियों का जलाभिषेक प्रारंभ होगा। भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा के अध्यक्ष पंडित केसी पांडेय व परामर्शदाता पंडित संतोष तिवारी ने बताया कि सावन के महीने में आने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। इस दिन भगवान शिव की विशेष रूप से पूजा-आराधना होती है और शिवलिंग पर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक किया जाता है। इसमें किया गया अनुष्ठान, भगवान भोलेनाथ की उपासना प्रत्येक मनोवांछित फल प्रदान करती है।
सबली महादेव मंदिर, छपकौली श्री श्यामेश्वर महादेव मंदिर सहित सभी मंदिरों में सुबह 5:50 बजे से कांवड़ जलाभिषेक प्रारंभ होगा। चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह 4:54 बजे से प्रारंभ होकर देर रात्रि 1:53 तक रहेगा। सुबह 4:54 बजे से 5:50 बजे तक 52 मिनट का चतुर्दशी तिथि वेध होने से दोषयुक्त व अपूर्ण है, इसलिए उदय-तिथि रेव शुभा ग्राह्या शास्त्रमत आधार पर सूर्योदय 5:50 बजे से शुद्ध मुहूर्त में जलाभिषेक प्रारंभ होगा।
शिवरात्रि पर भगवान शिव के चार प्रहर की रात्रि पूजन के लिए 10 घंटे 52 मिनट का समय प्राप्त हो रहा है। प्रत्येक प्रहर की पूजा के लिए दो घंटे 43 मिनट का समय निर्धारित रहेगा। प्रथम प्रहर पूजा शाम 6:58 बजे से रात्रि 9:41 बजे तक, द्वितीय प्रहर पूजा समय रात्रि 9:41 बजे से रात्रि 12:24 तक, तृतीय प्रहर पूजा समय रात्रि 12:24 बजे से तड़के 3:07 बजे तक व चतुर्थ प्रहर पूजा समय तड़के 3:07 बजे से प्रारंभ होकर सूर्योदय पूर्व 5:50 बजे तक होगा। जिसमें रुद्राभिषेक, जलाभिषेक आदि पूजन होगा।
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पूजा विधि

सुबह जल्दी ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहनें
घर के मंदिर में पूजा करें फिर इसके बाद घर के पास स्थित किसी शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष आराधना करें।
शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें।
इसके बाद दोबारा जल से अभिषेक करें और बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद चंदन और फूल अर्पित करें।
फिर भगवान शिव को फल और मिष्ठान के साथ नैवेद्य अर्पित करें।
इसके बाद ॐ नम: शिवाय मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और शिव चालीसा का पाठ करें।
अंत में शिव-पार्वती की आरती करें।
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