बारिश व ओलावृष्टि से बर्बाद हुए किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए शासन गंभीर है। सोमवार को शासन के मुख्य सचिव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से स्थानीय अधिकारियों को 25 दिसंबर तक प्रभावित किसानों को मुआवजा वितरित करने के निर्देश दिए हैं।
हालांकि नियमावली बदलने के कारण पहले आवंटित अधिकतर धनराशि शासन को सरेंडर कर दी गई है। पिछले वर्ष 2015 में बारिश व ओलावृष्टि से जिले में 83,079 किसान प्रभावित हुए थे।
नुकसान को देखते हुए केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा बड़े स्तर पर मुआवजे की घोषणा की गई थी। दोनों सरकारों द्वारा 59 हजार किसानों को 18,500 रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा वितरित किया गया।
जबकि 24,079 किसान मुआवजे से वंचित रह गये थे। हालांकि चुनाव से पहले सरकार ने 10.49 करोड़ रुपये का मुआवजा आवंटित तो कर दिया लेकिन इसके वितरण की नियमावली में बदलाव कर दिया गया।
नए नियम के अनुसार 18,500 रुपये की दर के सापेक्ष अब न्यूनतम एक हजार व अधिकतर 22 सौ रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से दिया जाना तय किया गया है। चेक न देकर इस मुआवजे की धनराशि किसानों के खाते में दी जानी है।
किसानों की संख्या व मुआवजा की धनराशि भी घट गई है। जिले में 13,724 किसानों को 1.44 करोड़ की धनराशि देनी तय की गई है। नियमावली बदलने से पहले जो 10.49 करोड़ की धनराशि जिले को प्राप्त हुई थी, उसमें से 9.05 करोड़ की धनराशि शासन को सरेंडर कर दिया गया है।
सोमवार को मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने वीसी के जरिए अधिकारियों को 25 दिसंबर तक किसानों के खाते में धनराशि भेजने के निर्देश दिए हैं।
डीएम अनिल ढींगरा ने बताया कि 689 किसानों के खातों में 7.61 लाख की धनराशि भेजी जा चुकी है। बाकी किसानों के खाते में भी निर्धारित समय सीमा से पहले धनराशि भेज दी जाएगी।