हापुड़। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय ज्ञानेंद्र सिंह यादव ने सोमवार को गैर इरादतन हत्या के मामले में निर्णय सुनाया। न्यायाधीश ने दोषी सूरजभान को सात साल कारावास और 23 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। दोषी की पत्नी को बरी कर दिया गया। मामले के अन्य दो आरोपियों की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है।
पुलिस के अनुसार 22 मार्च 2006 की सुबह करीब चार बजे मुकेश निवासी ग्राम खेड़ा थाना पिलखुवा को सूरजभान निवासी मोहल्ला चंदननगर पिलखुवा ने अपनी पत्नी प्रभा के सहयोग से अपनी आटा चक्की के पास पकड़ लिया। उन्होंने आरोपी पर बांट चोरी का आरोप लगा शोर मचा दिया। शोर सुनकर मोहल्ले के लोग एकत्रित हो गए और मुकेश को पीटते हुए थाने ले गए।
मुकेश के खिलाफ बांट चोरी करने के प्रयास का झूठा मुकदमा पंजीकृत कराया था। थाना पिलखुवा पुलिस द्वारा मुकेश को जेल भेज दिया गया था, जहां पर उपचार के दौरान मुकेश की 08 अप्रैल 2006 को मौत हो गई।
मुकेश की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आठ जगह चोट लगने की पुष्टि हुई। मामले की जांच पुलिस अपराध शाखा द्वारा की गई। पुलिस ने सूरजभान सहित कुल 16 लोगों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या सहित विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की। विवेचना के बाद पुलिस ने सूरजभान, उनकी पत्नी प्रभा, वीरेंद्र व रामवीर के खिलाफ गैर इरादतन हत्या सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश कर दिया था।
मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय में चल रही थी जहां, न्यायाधीश ज्ञानेंद्र सिंह यादव ने दोनों पक्षों को सुनकर मामले में निर्णय सुनाया। न्यायाधीश ने मामले के आरोपी सूरजभान को दोषी मानकर सात वर्ष कारावास और 23 हजार अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं, मामले की आरोपी प्रभा को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। इसके अलावा मामले के आरोपी वीरेेंद्र व रामवीर की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है।