ग्रामीण क्षेत्र में पशुओं का इलाज करने वाले झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ पशु पालन विभाग ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। विभाग के निर्देश पर ऐसे झोलाछाप चिकित्सकों को चिंह्नित कर मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी दी गई है। इसके लिए तीन टीमों का गठन किया जा चुका है।
बता दें कि दूर दराज के गांवों में पशुओं के बेहतर इलाज के लिए शासन ने पशुपालन विभाग में सचल पशु चिकित्सालय की व्यवस्था की है। इसके लिए विभाग को कई गाडिय़ां दी गई है। गाड़ी में पशुओं के इलाज से संबंधित तमाम किट मौजूद हैं। फोन पर सूचना मिलते ही उक्त गाडिय़ों में तैनात स्टॉफ कुछ ही देर में पशुपालक के पास पहुंच जाता है।
लेकिन जिले के चारों ब्लॉकों में 50 से ज्यादा झोलाछाप चिकित्सक सक्रिय हैं, जो पशुओं का इलाज कर रहे है। यह ही नहीं दवा के नाम पर भी अवैध वसूली की जा रही है। विभाग ने इसकी सूची तैयार कर ली है।
इतना ही नहीं सीवीओ ने तीन टीमों का गठन कर, ऐसे चिकित्सकों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। रंगे हाथ पकड़ में जाने पर संबंधित झोलाछाप डाक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी डा.वाईपी सिंह का कहना है कि पशुओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। झोलाछाप चिकित्सक देहात में ज्यादा सक्रिय हो गए हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है।