लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने को शासन गंभीर है। इसके लिए क्वालिटी प्रोग्राम के तहत गांवों में पाइपलाइन वाटर सप्लाई देने की तैयारी की जा रही है। इस संबंध में जलकल विभाग को कई बार नोटिस जारी कर प्रगति की रिपोर्ट मांगी जा चुकी है।
इसके बावजूद लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का अभियान कारगर नहीं हो रहा है। कई महीना बीत जाने पर भी ओवरहैड वाटर टैंक बनाने को जमीन की व्यवस्था अफसर नहीं कर पाए हैं।
क्वालिटी प्रोग्राम के तहत शासन ने दूषित भूजल क्षेत्र के आधार पर गांवों का चयन कर उनमें ओवर हैड टैंक, नलकूप, वाटर एटीएम सिस्टम व पूरे गांव में पानी की लाइन बिछाकर हर घर में कनेक्शन देने की योजना थी। जिले में ऐसे 59 गांवों को चिंहित किया गया।
एक गांव में करीब 1.25 करोड़ रुपये की लागत से कार्य होता था। इनमें से अधिकतर गांवों में कार्य अंतिम चरण है। ओवर हैड टैंक गांवों में सरकारी भूमि पर तो कई में ग्रामीणों ने अपने अपने हिस्से की भूमि देकर यह कार्य कराया है।
जिले में तीन गांव मंसूरपुर, भम्हैड़ा व भडंगपुर ऐसे हैं, जहां सरकारी भूमि न होने के कारण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है। ग्रामीण भी अपनी जमीन देने को तैयार नहीं है।
जांच में सामने आया है कि इन गांवों के भूजल में टीडीएस, पीएच, सल्फर, क्लोराइड, फ्लोराइड, सल्फेट, आयरन, नाइट्रेट, नाइट्रोजन, एल्केलिन्टी, हार्डनेश मानक स्तर से काफी अधिक पाये गये हैं।
सीडीओ कुणाल सिल्कू का कहना है कि शासन की मंशा है कि गांवों को शुद्ध पेयजल मुहैया हो। इसके लिए ग्रामीणों से वार्ता कर समस्या का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।
जल निगम के अधिशासी अभियंता संजय जैन का कहना है कि क्वालिटी प्रोग्राम के तहत इन तीन गांवों में सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। जमीन मिलते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा।