मीट बेचने वालों के लाइसेंसों का नगर पालिका प्रशासन द्वारा नवीनीकरण नहीं किये जाने से मीट विक्रेता परेशान हैं। बड़ी बात यह है कि वर्ष 2015 से मीट की बिक्री का न तो कोई लाइसेंस बना है और न ही किसी लाइसेंस का नवीनीकरण हुआ है। अब प्रशासन लाइसेंस जारी करने के लिए गाइड लाइन का इंतजार कर रहा है।
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के फरमान के बाद जिले में मीट कारोबार ठप हो गया। पुराने ढर्रे पर चली आ रही मीट की दुकानें नियम कानून के दायरे में फंसकर बंद हो गयी। दरअसल वर्ष 2015 तक हापुड़ क्षेत्र में करीब 70 मीट विक्रेताओं के लाइसेंस थे। मीट बिक्री के लिये लाइसेंस का हर वर्ष नवीनीकरण होता है।
लेकिन 2015 के बाद से न तो कोई नया लाइसेंस बनाया गया और न ही किसी का नवीनीकरण किया गया। ऐसी स्थिति में अब किसी भी विक्रेता के पास कोई लाइसेंस नहीं है। इससे कार्रवाई के डर से अधिकतर दुकानें बंद हैं।
नगर पालिका ईओ संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि फिलहाल शासन से लाइसेंस के संबंध में नई गाइड लाइन का इंतजार है। इसके बाद ही लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
उधर, कांग्रेस के पूर्व विधायक गजराज सिंह, जिलाध्यक्ष सैय्यद अयाजुद्दीन और शहर कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सगीर कुरैशी का कहना है कि मुस्लिम समाज के लोग मीट की आपूर्ति नहीं होने से परेशान हैं। अब इस संबंध में मीट विक्रेताओं का एक प्रतिनिधि मंडल लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री से भेंटकर न्याय की गुहार लगायेगा।