स्वदेशी राखियों से रिश्ते होंगे मजबूत
मुनीश शर्मा
हापुड़। इस बार भाई-बहन के आपसी प्रेम के बंधन की डोर को स्वदेशी राखियों की गांठ लगने से मजबूती मिलेगी। कोरोना संक्रमण के चलते बाजारों में स्वदेशी राखियों की भी धूम है। लोकल से वोकल की पहल के चलते दुकानदार चाइनीज राखियों को बेचने से भी दूरी बना रहे हैं।
कोरोना महामारी और चीन से तनाव के चलते आयात-निर्यात पर प्रभाव पड़ा है। राखी बाजार में छाए रहने वाले चीन को इस बार वैसी तबज्जो नहीं मिल पाएगी। हापुड़ के बाजारों में भी स्वदेशी राखियों की ही धूम है।
श्री श्याम राखी विक्रेता रोहन ने बताया कि हापुड़ में बड़े स्तर पर राखियों का निर्माण होता है। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते राखियों का निर्माण और ब्रिकी दोनों प्रभावित हैं। हापुड़ की हैंडमेड राखियां ही बाजार में बिक रही है। वहीं लोग भी राखियां खरीदने से पूर्व चाइनीज व स्वदेशी होने के बारे में जानकारी कर रहे हैं। उसके बाद ही राखियां खरीद रहे हैं।
हालांकि इस बार स्वदेशी राखियों की धूम ज्यादा है। चाइनीज राखियां बाजार से पूरी तरह से गायब है। हापुड़ के दुकानदार भी चाइनीज राखियों को नहीं बेच रहे हैं। भले ही चाइनीज राखियों के मुकाबले वैराइटी कम हो, लेकिन लोगों की पसंद स्वदेशी राखियां ही बनी हुई हैं।
चांदी वाली राखी की बढ़ी डिमांड
रक्षाबंधन पर आर्टिफिशयल से लेकर शुद्ध चांदी की राखियों की भी डिमांड रहती है। लोग अपनी सामर्थ्य अनुसार चांदी की राखियों को भी वरीयता देते हैं। लवकुश ज्वैलर्स के मालिक अक्षय शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वदेशी को वरीयता देने, लोकल को वोकल के चलते भी चंादी की राखियों की डिमांड बढ़ी है। अभी तक करीब दो दर्जन चांदी की राखियों के आर्डर आ चुके हैं। रक्षाबंधन तक यह आंकड़ा अभी और बढ़ेगा। हालांकि विगत वर्षों में आंकड़ा काफी कम रहता था।
टेडी बियर बेस्ड राखी बच्चों की प्रिय
स्वदेशी राखियों में साधा राखियों से लेकर राधा-कृष्ण, डोरीमोन, छोटा भीम, छुटकी, निंजा हथौड़ी, हनी-बनी आदि राखियां शामिल हैं। कार्टून बेस्ड राखियां बच्चों की खूब पसंद है। चाइनीज राखियों को रिप्लेस करने के लिए स्वदेशी राखियों में इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
राखी स्वदेशी और सस्ती भी
स्वदेशी राखियां की गुणवत्ता चाइनीज राखियों के मुकाबले काफी बेहतर होती है। बाजार में राखियां स्वदेशी होने के साथ-साथ सस्ती भी हैं। बाजार में धागे वाली राखी की शुरूआत करीब तीन रुपये से हैं। जबकि डिजाइन और वैराइटी के आधार पर राखियों की अधिकतम कीमत 20 तक हैं।