फाटकों को बंद कर रेलवे द्वारा बनाए गए अंडरपास ग्रामीणों के जी का जंजाल बन गए हैं। बारिश के पानी से कच्चे अंडरपास में कीचड़ और जलभराव के कारण आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।
भारी वाहनों का गांव में प्रवेश व निकास लगभग रुक गया है। ऐसे में गांव के बाहर बने गन्ना क्रय केंद्रों पर गन्ने से भरी बुग्गी, ट्रॉली ले जाने में किसानों को काफी परेशानी हो रही है।
खुर्जा से मेरठ तक बने फाटकों को बंद करने के उद्देश्य से रेलवे ने अंडरपास बनाने का कार्य शुरू किया है। हापुड़ के नजदीकी गांव दादरी, पांची, महमूदपुर सहित दर्जनों गांवों में अंडरपास बनाए जा चुके हैं, लेकिन इन्हें अब तक पक्का नहीं किया गया है।
शनिवार को बरसात होते ही कच्चे अंडरपास के नीचे जलभराव हो गया। इतना ही नहीं अंडरपास के किनारों पर लगी मिट्टी कटकर नीचे की तरफ आ गई, इससे कीचड़ हो जाने के कारण लोगों को वहां से निकलने में काफी परेशानी हुई। दुपहिया वाहनों से आवागमन करने वाले कई लोग गिरकर घायल हो गए।
गांव दादरी निवासी मगन प्रकाश त्यागी ने कहा कि वह अंडरपास निर्माण का इसीलिए विरोध कर रहे थे, क्योंकि उन्हें पता था कि बरसात के समय ऐसी ही स्थिति पैदा होगी। भारी वाहन न तो गांव में आ पा रहे हैं और न ही गांव से बाहर जा पा रहे हैं।
गांव पांची निवासी रजनीश त्यागी का कहना है कि अंडरपास में जलभराव होने के कारण पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया है। गन्ना क्रय केंद्रों पर गन्ना पहुंचाना मुश्किल हो गया है। प्रशासनिक अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।