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Hapur News: मोनाड विवि के मामले में प्रमुख सचिव ने जिला प्रशासन से मांगी जांच रिपोर्ट

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पिलखुवा स्थित मोनाड विश्वविद्यालय। संवाद - फोटो : Archive
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हापुड़। मोनाड विवि में फर्जी डिग्री और मार्कशीट के मामले में अब प्रमुख सचिव शिक्षा ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। पुन: हो रही जांच और दर्ज किए गए बयान आदि की रिपोर्ट डीएम और सीडीओ के स्तर से बनाई जा रही है। इसे बहुत जल्द शासन को भी भेजा जाएगा। शासन जिस तरह की गंभीरता से इसकी रिपोर्ट को तलब कर रहा है, ऐसे में मोनाड के पदाधिकारियों की गर्दन एक बार फिर फंसती नजर आ रही है।
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पिछले वर्ष मोनाड विवि में फर्जी डिग्री और मार्कशीट मिलने के आरोपों के मामले में पिलखुवा कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। तभी से ही उच्च शिक्षा विभाग, पुलिस, यूपी एसटीएफ, जिला समाज कल्याण विभाग अलग-अलग जांच कर रहे हैं। इस मामले में आरोपी जमानत पर हैं।
पिछले महीने विशेष सचिव शिक्षा ने प्रकरण की फिर से जांच करने, जांच कमेटी की रिपोर्ट को शामिल करने और अन्य तथ्यों को जांच में शामिल करने को लेकर डीएम को आदेश जारी किए थे। इस मामले में मात्र एक व्यक्ति ने नई शिकायत दर्ज कराई है। वहीं, जिला प्रशासन की ओर से एसटीएफ से जांच रिपोर्ट लेकर उसे शामिल किया गया है। इसी प्रकार अन्य विभागों से भी रिपोर्ट ली गई है।
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इस पूरी रिपोर्ट को तैयार करके पिछले सप्ताह भेजना था, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से रिपोर्ट नहीं जा सकी थी। अब इस मामले में प्रमुख सचिव शिक्षा ने बिंदुवार सभी रिपोर्ट मांगी है। वहीं, जिला प्रशासन की तरफ से रिपोर्ट तैयार कर डीएम कविता मीना को भेज दी गई है। मामले में सीडीओ श्रुति शर्मा का कहना है कि जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेज दी गई है। बहुत जल्द जिले से शासन को रिपोर्ट चली जाएगी।
एसटीएफ ने कई महीने की थी लंबी जांच
मोनाड मामले में एसटीएफ की टीम ने छापे के बाद यहां लंबी जांच की थी। इस दौरान कई दिन टीम मोनाड विश्वविद्यालय में डारा डाले रही थी। टीम ने न सिर्फ दस्तावेजों, कंप्यूटर डाटा की गहनता से जांच की, बल्कि जो कर्मचारी डर के कारण विश्वविद्यालय भी नहीं आ रहे थे। उनके घर पर जाकर भी उनसे पूछताछ की। ये सारे साक्ष्य जिला प्रशासन ने एसटीएफ से मंगाकर अपनी रिपोर्ट में शामिल किए हैं। शासन इस मामले को लेकर इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि यह हाईप्रोफाइल होने के साथ हजारों छात्र छात्राओं के भविष्य से जुड़ा हुआ मामला है। शासन ने इस मामले में रिपोर्ट जमा करने में देरी पर भी नाराजगी दिखाई है। कुल मिलाकर शासन रिपोर्ट के आधार पर मामले में बड़ी कार्रवाई कर सकता है।
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