फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hapur News: जिला अस्पताल को 24 घंटे बिजली आपूर्ति देने की लाइन एक सप्ताह से ठप

Fri, 29 Aug 2025 10:35 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
विज्ञापन
विज्ञापन
हापुड़। दस्तोई रोड पर 33 करोड़ से बने 100 बेड के जिला अस्पताल को 24 घंटे बिजली आपूर्ति देने वाली लाइन एक सप्ताह से ठप पड़ी है। तीन विभागों के बीच पेच फंसा होने के कारण फाल्ट ठीक नहीं कराया जा रहा। इस कारण बच्चा नर्सरी, ब्लड बैंक, कोल्ड चैन प्रभावित हो रहे हैं, दिनरात जनरेटर चलाकर इन इकाइयों को आपूर्ति दी जा रही है।
विज्ञापन

जिला अस्पताल का निर्माण 2018 में पूर्ण हुआ था, तभी से अस्पताल को 24 घंटे सप्लाई के लिए स्वतंत्र फीडर बनाने की प्रक्रिया चल रही है। पैकफेड को फीडर बनाने की जिम्मेदारी मिली थी। करीब छह महीने में कार्य पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन इस कार्य में करीब सात साल बीत गए। इसका कारण समय से बजट न मिलना भी रहा।

बहरहाल, पिछले दिनों 24 घंटे सप्लाई का फीडर चालू भी हो गया, लेकिन अब एक सप्ताह से अस्पताल को 24 घंटे आपूर्ति देने वाली लाइन ठप पड़ी है। इसका असर अस्पताल के संसाधनों के साथ वार्ड और मरीजों पर भी पड़ रहा है।
विज्ञापन


किसी तरह देहात के फीडर से जिला अस्पताल को सप्लाई मिल रही है। लेकिन इस लाइन में हर घंटे ट्रिपिंग होती है। इसके कारण कई बार ओपीडी अंधेरे में चलती है। वार्डों में भी पंखे बंद हो जाते हैं।



-इसलिए उलझ रहा है मामला-

जिला अस्पताल का स्वतंत्र फीडर ऊर्जा निगम ने तैयार नहीं कराया, सिर्फ 15 फीसदी सुपरवीइन शुल्क पर यह कार्य शुरू हुआ। लाइन निर्माण की देखरेख करने वाले एसके अग्रवाल ने बताया कि लाइन चालू कर, जिला अस्पताल के हेंडओवर की जा चुकी है। अस्पताल ने लाइन ऊर्जा निगम के हेंडओवर कर दी है। ऐसे में संस्था की अब लाइन को लेकर कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है। जबकि ऊर्जा निगम के अधिकारियों का कहना है कि लाइन बनाने के 18 महीने तक लाइनों की देखरेख संस्था की हो होती है। ऐसे में तीनों विभाग एक दूसरे पर जिम्मेदारी का पल्ला झाड़ रहे हैं।

-

-बेहद संवेदनशील इकाईयों में बढ़ा जोखिम-

जिला अस्पताल की बच्चा नर्सरी में अधिकांश नवजात ऐसे भर्ती हैं, जो दौरे पडऩे, कमजोर वजन, ऑक्सीजन की बेहद जरूरत वाले बच्चे हैं। इनमें यदि कुछ समय के लिए भी सप्लाई चली जाए तो बच्चों की जान संकट में पड़ सकती है। इसके लिए 24 घंटे जनरेटर चलाना पड़ रहा है।

-

-24 घंटे सप्लाई नहीं मिलने का यह पड़ रहा असर-

*ऑक्सीजन प्लांट नहीं चल पा रहे हैं।

*बच्चा नर्सरी प्रभावित, चलाना पड़ रहा जनरेटर।

*ब्लड बैंक में रक्त का संरक्षण प्रभावित।

*एक्सरे, अल्ट्रासाउंड मशीनों को खतरा।

*वैक्सीन स्टोरेज के लिए कोल्डचेन टूटने का खतरा।

*वार्ड में भर्ती गंभीर रोगियों का उपचार प्रभावित।

-

-संस्था को 18 महीने तक करनी है देखरेख-

लाइन का निर्माण करने वाली संस्था अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रही है, 18 महीने तक लाइन की देखरेख का जिम्मा संस्था का है। इसके बाद ऊर्जा निगम पर जिम्मेदारी आएगी। हमारे स्तर से कोई लापरवाही नहीं की जा रही है और न ही जिम्मेदारी से पीछे हटा जा रहा है।एसके अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता।



-डीएम को अवगत कराया, संस्था ने लिखकर दिया पत्र-

जिला अस्पताल को 24 घंटे बिजली आपूर्ति करने वाली लाइन करीब एक सप्ताह से बंद है। संस्था की ओर से लिखित में दिया गया है कि उनकी जिम्मेदारी नहीं है। इस मामले में डीएम को अवगत कराया गया है।डॉ.हेमलता, सीएमएस।
विज्ञापन




जतिन त्यागी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें