माता-पिता को अब बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो रहे निमोनिया से भयभीत होने की जरूरत नहीं है। एक टीका ही निमोनिया के खतरे को दूर कर देगा।
केंद्र सरकार ने गरीबों की पहुंच से दूर न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (पीसीवी) को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल करने का फैसला किया है। सूबे के अस्पतालों में जल्द ही टीका भेज दिया जाएगा।
छोटे बच्चों को सर्वाधिक परेशानी में डालने वाला रोग निमोनिया है। इससे बचाव का टीका बेहद महंगा होने के कारण गरीब अभिभावक अपने बच्चों को टीका नहीं लगवा पाते हैं। नतीजतन, बड़ी संख्या में इससे बच्चों की मौत हो जाती है।
समस्या को देखते हुए अब केंद्र सरकार ने पांच साल तक के बच्चों की मृत्यु दर को कम करने के लिए इस टीके को लगवाने का निर्णय लिया है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश अनुरागी का कहना है कि फेफड़ों का संक्रमण ही निमोनिया है। यह चार प्रकार का वायरल, बैक्टीरियल, ट्यूबरकुलर व केमिकल होता है। निमोनिया में बच्चा सर्दी, जुकाम, लगातार खांसी, बलगम आना, सांस तेज चलना, पसलियां चलना, नाखून, होठ व हाथ-पांव नीले पड़ना व बुखार से पीड़ित रहता है।
न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन की बाजार में कीमत चार हजार से दस हजार रुपये तक है। राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत यह बच्चों को मुफ्त में लगाया जाएगा। डब्ल्यूएचओ ने पूर्व सरकारों में भी पीसीवी को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल करने का सुझाव दिया,
मगर 2,700 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ बढ़ने से इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल करने की सहमति दे दी है। उत्तर प्रदेश में जल्द ही इसे लांच किया जाएगा।
चिकित्सकों की मानें तो बच्चों को जन्म से छह सप्ताह, आठ सप्ताह, नौ माह पर लगने वाली पीसीवी से निमोनिया का खतरा जड़ से खत्म हो जाएगा।
डिप्टी सीएमओ डॉ. प्रवीण शर्मा का कहना है कि शासन से सहमति मिलने के बाद अब जल्द ही राष्ट्रीय कार्यक्रम में निमोनिया का टीका शामिल हो जाएगा। सरकारी अस्पतालों में निशुल्क टीका बच्चों को लगाया जाएगा।