थारू जनजाति को मिली नई पहचान
बलरामपुर जिले में थारू जनजाति की अच्छी खासी आबादी निवास करती है। सरकार की ओर से इस समुदाय के लिए विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसी क्रम में अमर उजाला के संवाददाता थारू जनजाति सांस्कृतिक संग्रहालय पहुंचे और वहां लोगों से बातचीत की। थारू समाज के अरुण ने बताया कि थारू जनजाति के लोग प्रायः अपने समाज के बीच रहना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि इस जनजाति के लोग लखीमपुर, बलरामपुर, बिहार तथा नेपाल की तराई के क्षेत्रों में रहते हैं। अरुण के अनुसार संग्रहालय बनने के बाद अब लखनऊ और दिल्ली समेत देश के अन्य हिस्सों में भी लोग थारू जनजाति के बारे में जानने लगे हैं और समुदाय को नई पहचान मिली है। वहीं धनीराम थारू ने बताया कि संग्रहालय बनने से उनकी पहचान पूरे देश में बनी है।
राप्ती की बाढ़ से उजड़े परिवार को मिला आसियाना
बलरामपुर में राप्ती नदी के किनारे बसा कल्याणपुर गांव बाढ़ की चपेट में आकर उजड़ गया था। इसके बाद प्रभावित परिवारों को मां पाटेश्वरी विला सिटी में बसाया गया। यहां लोगों को मिल रही सुविधाओं को लेकर अमर उजाला की टीम ने स्थानीय निवासियों से बातचीत की। मनसा राम यादव ने बताया कि बाढ़ की वजह से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी की जांच के बाद जमीन चिन्हित की गई और विधायक तथा जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री तक मामला पहुंचने के बाद फाइल मंजूर हुई। इसके बाद 66 परिवारों को यहां आवास उपलब्ध कराया गया। वहीं स्थानीय निवासी राम सुंदर ने बताया कि सरकार ने उन्हें जमीन और आवास उपलब्ध कराया है, जिससे अब वे पहले की तुलना में बेहतर जीवन जी रहे हैं।
जिले को मिला पहला रेलवे ओवरब्रिज
बलरामपुर में लंबे समय से ट्रैफिक जाम एक बड़ी समस्या थी। रेलवे ओवरब्रिज बनने के बाद लोगों को इस समस्या से काफी राहत मिली है। इस संबंध में अमर उजाला की टीम ने स्थानीय लोगों से बातचीत की। जय प्रकाश यादव ने बताया कि फुलवरिया बायपास बनने से लोगों को बड़ी सुविधा मिली है। पहले दवा लेने जाने के लिए आठ से दस किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता था, लेकिन अब आवागमन आसान हो गया है। वहीं कृष्ण मोहन शुक्ल ने कहा कि पुल निर्माण से लोगों को काफी राहत मिली है। अब एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचना पहले की तुलना में आसान हो गया है और जो दूरी पहले एक घंटे में तय होती थी, वह अब करीब दस मिनट में पूरी हो जाती है।