भाद्रपद पूर्णिमा पर ब्रजघाट में गंगा स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
ब्रजघाट। भाद्रपद पूर्णिमा पर रविवार को भक्तों ने ब्रजघाट गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर दिवंगत पितरों का तर्पण किया। गरीब-निराश्रितों को भोजन-वस्त्र का दान दिया गया। चंद्र ग्रहण का सूतक लगने के कारण स्नान का सिलसिला दोपहर तक ही चला।
भाद्रपद पूर्णिमा के मद्देनजर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान के साथ ही पश्चिमी उप्र के विभिन्न जनपदों के श्रद्धालुओं का आगमन शनिवार देर शाम से प्रारंभ हो गया था। रविवार की सुबह शुभ मुहूर्त प्रारंभ होते ही भक्तों ने हर-हर गंगे के जयकारों के बीच गंगा में डुबकी लगाने का सिलसिला शुरू हुआ जो दोपहर तक स्नान का क्रम चलता रहा। श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाने के बाद किनारे पर बैठे पंडितों से भगवान सत्यनारायण की कथा सुनी और मंदिरों में दर्शन किया।
विभिन्न स्थानों से आए भक्तों ने गंगा में डुबकी लगाने के बाद किनारे पर अपने दिवंगत पूर्वजों का श्राद्ध कर्म भी किया। पं. राजकुमार शर्मा ने बताया कि बिहार के गयाधाम में पितरों का श्राद्धकर्म करना सबसे शुभ माना जाता है लेकिन अगर ऐसा संभव नहीं है तो गंगा के किनारे श्राद्धकर्म कर्म करने का सर्वाधिक महत्व है। इसमें भी विफल रहने वाले अपने घरों पर श्राद्ध कर्म और दिवंगत पितरों का तर्पण कर सकते हैं।
भाद्रपद पूर्णिमा पर ब्रजघाट में गंगा स्नान करते श्रद्धालु। संवाद