गढ़मुक्तेश्वर। नगर समेत ग्रामीण क्षेत्रों में चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा पर प्रथम नवरात्र पर भक्तों ने व्रत रखकर मां शैलपुत्री की आराधना की। प्रथम दिन क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। दिनभर मंदिरों में माता के भजन गाए गए। इससे माहौल भक्तिमय बना रहा। वहीं, आज (शुक्रवार) को भक्त मां ब्रह्मचारिणी की अर्चना करेंगे।
पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि नवरात्र का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। मां ब्रह्मचारिणी देवी दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं। विनोद शास्त्री ने बताया कि इन्हें संयम, तपस्या और त्याग की देवी माना जाता है। उनका स्वरूप ज्योतिर्मय और तेजस्वी है। जो भक्त मां ब्रह्मचारिणी की उपासना करते हैं, उन्हें साधना और तप का फल प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लेने के बाद देव ऋषि नारद के उपदेश के उपरांत उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया। उनकी तपस्या से ब्रह्मा जी ने आशीर्वाद दिया कि भगवान शिव पति के रूप में उन्हें प्राप्त होंगे। मां भगवती के पावन पर्व पर क्षेत्र के अधिकांश मंदिर सजाए गए हैं। मंदिरों और आसपास के क्षेत्र में सफाई व्यवस्था भी दुरूस्त की गई है।