चुनावी साल में मुख्यमंत्री जहां पेंशन पाने वाली महिलाओं को बकायदा पत्र भेजकर शुभकामनाएं दे रहे हैं। वहीं, एक वृद्धा अधिकारियों की लापरवाही से सरकारी रिकॉर्ड में खुद को जिंदा साबित करने के लिए अफसरों के चक्कर लगा रही है।
जबकि कुछ महिलाओं की पेंशन विभाग में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है। गढ़मुक्तेशरा निवासी भागरती देवी (50) को हर माह तीन सौ रुपये समाजवादी विधवा पेंशन मिलता था। डेढ़ साल से रिकॉर्ड में उन्हें मरा हुआ दर्शाकर पेंशन रोक दी गई।
इसके लिए डेढ़ वर्ष से भागरती देवी सरकारी रिकॉर्ड में खुद को जिंदा साबित करने के लिए समाज कल्याण विभाग और दूसरे अधिकारियों के समक्ष चक्कर लगा रही हैं लेकिन अधिकारी रोज उसे टरका दे रहे हैं।
एक अन्य मामले में इसी गांव की विमला देवी पत्नी सुंदर की समाजवादी पेंशन तीन साल पहले अचानक बंद हो गयी। समाज कल्याण विभाग में शिकायत की तो पता चला कि उनकी पेंशन बदस्तूर आ रही है लेकिन उनके खाते में नहीं पहुंच रही।
अब सबसे बड़ी बात यह है कि तीन साल से उनकी पेंशन आखिरकार किसके पास जा रही है। इस मामले की शिकायत पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इस संबंध में जिला समाज कल्याण विभाग अधिकारी राजेश सक्सेना का कहना है कि मृतक दर्शायी गयी महिला से कुछ दस्तावेज मांगे गए हैं उनके जमा होने के बाद पेंशन मिलनी शुरू हो जाएगी।