हापुड़। फर्जी डिग्री और मार्कशीट बेचने के मामले में एक बार फिर जांच के बाद डीएम और सीडीओ ने मोनाड विश्वविद्यालय की मान्यता रद्द करने की संस्तुति की है। इसके बाद विश्वविद्यालय की मान्यता पर खतरा गहरा गया है। दरअसल, उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव के आदेश पर डीएम की अध्यक्षता में हुई पुन: जांच की रिपोर्ट भेज दी गई है। इसमें तत्कालीन डीएम अभिषेक पांडेय की अध्यक्षता वाली समिति की जांच रिपोर्ट का समर्थन किया है। इसके बाद विवि की मान्यता व पंजीकरण को निरस्त किया जा सकता है। हालांकि, यह निर्णय शासन स्तर से होना है। इससे पहले 53 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में समाज कल्याण विभाग के निदेशक विवि को तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर चुके हैं।
पिलखुवा स्थित मोनाड विश्वविद्यालय पर सबसे पहले वर्ष-2019 में छात्रों ने ही फर्जी डिग्री बेचने और मार्कशीट बनाने का आरोप लगाया था। इसके बाद एसआईटी की टीम ने प्रबंधक समेत तीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें तीनों लोगों को जेल भेजा गया था। इसके बाद वर्ष 2025 में यूपी एसटीएफ की टीम ने फर्जी डिग्री और मार्कशीट बेचने के आरोपों पर विश्वविद्यालय में छापा मारा था। मामले में 12 आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए बड़ी मात्रा में फर्जी मार्कशीट व डिग्री, सर्वर और कंप्यूटर डेटा आदि जब्त करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन डीएम अभिषेक पांडेय और एसपी ज्ञानंजय सिंह ने उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर विवि की मान्यता व पंजीकरण को निरस्त करने की मांग की थी। इसके अलावा शासन ने 25 अक्तूबर 2025 को डीएम की अध्यक्षता में एक जांच समिति का गठन किया था। इसके बाद टीम ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी थी।
विवि के कुलपति और उप कुलसचिव से किया जवाब-तलब
फर्जी डिग्री व मार्कशीट बांटने के आरोपों में विवि को लेकर दोबारा जांच इसी वर्ष जून में शुरू हुई थी। डीएम कविता मीना की अध्यक्षता वाली जांच समिति में शामिल सीडीओ श्रुति शर्मा ने विश्वविद्यालय के कुलपति मोहम्मद जावेद, उप कुलसचिव कर्नल डीपी सिंह सहित पांच लोगों से सवाल-जवाब कर उनका पक्ष दस्तावेज के साथ दर्ज किया था। इसमें डीएम की अध्यक्षता में नई जांच टीम का गठन किया गया है। समिति को इस मामले में सोमवार को विश्वविद्यालय पहुंचकर जांच करनी थी।
विभिन्न कोर्सों की 1421 बनी फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट मिली
डीएम अभिषेक पांडेय ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि एसटीएफ को मोनाड विवि में छापे के दौरान विभिन्न कोर्सों की 1421 बनी फर्जी डिग्रियां व मार्कशीट आदि को बरामद किया था। साथ ही बड़ी मात्रा में खाली मार्कशीट भी बरामद की गईं। उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक आदि राज्यों में इन फर्जी डिग्रियों को बेचने का मामला एसटीएफ की जांच में सामने आया था।
ईडी भी जब्त कर चुकी है 25 करोड़ रुपये की संपत्ति
पिछले दिनों प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी हापुड़ स्थित मोनाड विवि से जुड़े फर्जी डिग्री रैकेट के मामले में आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम के तहत कार्रवाई की थी। आरोपियों की 25.44 करोड़ रुपये कीमत की संपत्तियों को जब्त किया है, इसमें आरोपियों के परिवार के फार्महाउस, फ्लैट और गाड़ियां शामिल हैं। जांच में सामने आया था कि विश्वविद्यालय के संचालक बिजेंद्र सिंह हुड्डा और संदीप सहरावत ने संसाधनों का दुरुपयोग किया। 1800 से ज्यादा छात्रों को फर्जी दस्तावेज बेचकर करीब 37 करोड़ रुपये जुटाए थे।
छात्रों की पढ़ाई पूरी कराने के लिए बन सकती है अंतरिम समिति
यदि शासन स्तर से विवि की मान्यता को रद्द कर दिया जाता है तो फिर वर्तमान में विभिन्न कोर्सों की पढ़ाई कर रहे छात्रों के भविष्य पर संकट पैदा हो सकता है। इस स्थिति में राज्य सरकार विवि का नियमित प्रबंधन हटाकर विश्वविद्यालय के कामकाज को संभालने के लिए तीन सदस्यीय अंतरिम समिति नियुक्त कर सकती है। अंतिम बैच की पढ़ाई पूरी होने के बाद अंतरिम समिति राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट देगी। इसके बाद राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना जारी करके विवि की मान्यता व पंजीकरण को समाप्त करने का आदेश दे सकती है। संपत्ति को लेकर भी सरकार के स्तर से ही निर्णय होंगे।
डीएम कविता मीना का कहना है कि जिला स्तर से पुन: जांच रिपोर्ट संस्तुति कर भेजी गई है। फर्जी डिग्री और मार्कशीट के मामले में तत्कालीन डीएम अभिषेक पांडेय की कार्रवाई की जांच रिपोर्ट का समर्थन किया गया है।
कुलपति मोहम्मद जावेद का कहना है कि फर्जी डिग्री व मार्कशीट के मामले में विश्वविद्यालय का कोई संबंध नहीं है। हम अपना पूरा पक्ष दे चुके हैं। न्यायालय में भी यह मामला विचाराधीन है।