हापुड़। एलपीजी सिलिंडर को लेकर जारी परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। काॅमर्शियल सिलिंडर न मिलने का असर धरातल पर भी दिख रहा है।
कुछ दुकानों और ठेलों पर लकड़ी से चूल्हे और कोयले की भट्ठियां चलाई जाने लगी हैं। हालांकि, अधिकतर होटल, ठेलों पर घरेलू सिलिंडर का प्रयोग हो रहा है। शिकायतों के बाद भी इस दिशा में जिले में अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
मार्च के प्रथम सप्ताह से शुरू हुई एलपीजी गैस सिलिंडर की परेशानी अभी भी जारी है। 20 दिनों के बाद भी जिले की सभी 35 गैस एजेंसियों व उनके गोदामों पर गैस सिलिंडर के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं। शुक्रवार की सुबह से लेकर दोपहर तक भी कई बार सर्वर डाउन हुआ। इस वजह से भी एजेंसियों पर लाइनें लगी रहीं।
जिले में प्रतिदिन कॉमर्शियल सिलिंडर की मांग 500 से अधिक है। हालांकि, रेहड़ी-पटरी लगाने वाले शुरू से ही घरेलू सिलिंडर का खुलेआम प्रयोग करते आए हैं। ऐसे में जो लोग काॅमर्शियल सिलिंडर का प्रयोग करते थे, अब वह भी काॅमर्शियल सिलिंडर न मिलने के कारण घरेलू गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं।
जिला पूर्ति अधिकारी डॉ. सीमा सिंह ने बताया कि काॅमर्शियल गैस सिलिंडर की मांग की गई है। कुछ सिलिंडर मिले हैं, जिनकी आपूर्ति नियमानुसार हुई है। जिले में गैस की कोई कमी नहीं है। लोगों को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है।
सिकंदर गेट पर गैस सिलिंडर न मिलने के कारण होटल पर लकड़ी जलाकर चूल्हें पर खाना बनाते युवक।संवाद
सिकंदर गेट पर गैस सिलिंडर न मिलने के कारण होटल पर लकड़ी जलाकर चूल्हें पर खाना बनाते युवक।संवाद