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Hapur News: नैनो डीएपी नहीं आ रही रास, दानेदार यूरिया पर किसानों को आस

Thu, 12 Dec 2024 11:02 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
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हापुड़। दानेदार यूरिया और डीएपी का विकल्प (तरल उर्वरक) किसानों को रास नहीं आ रहा। दो साल में समितियां सिर्फ 22631 बोतल नैनो यूरिया और 10801 बोतल डीएपी बेच सकी हैं। जबकि इन दो साल में दानेदार उर्वरकों के आठ लाख से अधिक कट्टे किसानों ने खरीदें हैं।
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खरीफ और रबी फसलों की बुवाई में यूरिया, डीएपी, एनपीके की जरूरत पड़ती है। पिछले कुछ साल से नैनो यूरिया और डीएपी का प्रयोग करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका प्रयोग स्प्रे के जरिए होता है, किसान अपनी मर्जी से कम ही तरल उर्वरक लेते हैं। लेकिन अभी भी किसान दानेदार उर्वरकों को ही पसंद कर रहे हैं।

इस साल रबी फसलों की बुवाई के दौरान दानेदार उर्वरकों की कमी रही, जिसके कारण तरल उर्वरकों की बिक्री अधिक हुई। लेकिन आंकड़ा अभी भी संतोषजनक नहीं है। अधिकारी इन उर्वरकों का परिणाम अच्छा बताते हैं, जबकि किसान कहते हैं कि स्प्रे से छिड़काव पर नैनो यूरिया और डीएपी संतोषजनक असर नहीं दिखाते हैं। (संवाद)
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एक अप्रैल 2023 से 10 दिसंबर 2024 तक उर्वरक वितरण की स्थिति-

उर्वरक बिक्री मात्रा

नैनो यूरिया 22630 बोतल

नैनो डीएपी 10801 बोतल

दानेदार यूरिया 507955 कट्टे

दानेदार डीएपी 269040 कट्टे

एनपीके 572 एमटी


अक्तूबर और नवंबर में बिकी सबसे अधिक नैनो डीएपी

अक्तूबर और नवंबर महीने में आलू और गेहूं की बुवाई के चलते दानेदार डीएपी की किल्लत समितियों पर रही। जिस कारण इन दो महीने में सर्वाधिक 8100 बोतल नैनो डीएपी की बिक्री हुई। जोकि पिछले दो सालों में बिकी मात्रा से भी पांच गुना है। हालांकि नैनो यूरिया की बिक्री पिछले सालों के मुकाबले घटी है।



फसलों को नहीं मिलता खास लाभ-

समितियों से जबरन नैनो डीएपी और यूरिया दिया जाता है। इसका फसलों में असर खास नहीं होता। स्प्रे करने में भी परेशानी होती है। किसानों को दानेदार उर्वरक ही संतोषजनक लगते हैं। - जतिन चौधरी, किसान रसूलपुर।फोटो संख्या२२



किसानों पर थोंपा जा रहे नैनो उर्वरक-

खेतों में नैनो यूरिया और डीएपी का प्रयोग किया है। खास लाभ नहीं दिखा, इससे अधिक असर दानेदार उर्वरकों में दिखता है। किसानों पर समितियों से बिन वजह तरल उर्वरक थोंपा जा रहा है।-शिवकुमार त्यागी, किसान धनौरा।फोटो संख्या२३



कोट -

फसलों में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का असर अधिक होता है। क्योंकि स्प्रे के जरिए यह उर्वरक सीधे फसलों की पत्तियों को मिलता है, जबकि दानेदार यूरिया और डीएपी जमीन पर गिरता है। जिसमें बहुत सी मात्रा खराब हो जाती है। किसानों में तरल उर्वरकों का रुझान बढ़ रहा है।प्रेम शंकर, एआर कोऑपरेटिव।
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