हापुड़। कम उम्र में युवा बीमारियों से जूझ रहे हैं, 25 की उम्र में ही रक्तचाप, हार्मोनल असंतुलन, निसंतानता समेत अनेकों बुजुर्गों जैसी बीमारियां उन्हें घेर रही हैं। हापुड़ में मधुमेह और रक्तचाप के दस हजार से अधिक युवा चिन्हित किए गए हैं। मानसिक रोगों से भी बड़ी संख्या में युवा जूझ रहे हैं।
सीएचसी के फिजिशियन डॉ.अशरफ अली ने बताया कि 18 से 35 वर्ष की आयु के युवाओं में मोटापा अब लाइफस्टाइल महामारी बन चुका है। जंकफूड, शीतल पेय, देर रात का खाना, और दिनभर स्क्रीन पर चिपके रहने की आदत ने न केवल शरीर का संतुलन बिगाड़ा है, बल्कि यह गंभीर बीमारियों का स्थायी निमंत्रण बन गया है। मोटापा, मधुमेह, उच्चरक्तचाप, दिल के रोग, फैटी लिवर और स्ट्रोक जैसी समस्याओं का सबसे बड़ा कारण बन चुका है।
आयुर्वेदाचार्य डॉ.धंवंतरि त्यागी ने बताया कि पहले जो रोग 50-60 की उम्र में होते थे, अब 25-30 की उम्र में आम हो गए हैं। शरीर का यह समय, जब जोश और ताजगी का शिखर होना चाहिए, अब थकान, दवाइयों और जांच रिपोर्टों के बोझ से दब गया है।
लड़कों के साथ-साथ लड़कियों में मासिक चक्र की समस्या, गर्भाशय या अंडाशय में गांठ, किसी विशेष कारण के बिना निसंतानता के मामले काफी बढ़ रहे हैं। इसके मूल कारण में खराब भोजन और जीवन शैली है। जिला अस्पताल के फिजिशिन डॉ. प्रदीप मित्तल ने बताया कि सपनों की नौकरी, अपना घर, परिवार के साथ वक्त बिताने के दिन आने से पहले ही कई लोग अस्पतालों के चक्कर लगाने लगते हैं।
युवाओं के लिए काउंसलिंग की है व्यवस्था
खराब दिनचर्या के कारण मधुमेह, रक्तचाप के मरीजों की भीड़ काफी बढ़ रही है। अस्पतालों में युवाओं के लिए काउंसलिंग की व्यवस्था कराई गई है। मानसिक रोग के लिए अगल से ओपीडी शुरू की गई है। - डॉ. सुनील त्यागी, सीएमओ।