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Hapur News: कई प्रदेशों तक फैला है मोनाड विश्वविद्यालय के फर्जीवाड़े का जाल

Mon, 19 May 2025 10:25 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
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हापुड़। मोनाड विश्वविद्यालय के फर्जीवाड़े के तार कई प्रदेशों से जुड़े हुए हैं। इससे पहले भी फर्जी मार्कशीट के मामले सामने आ चुके हैं। तब सबूतों का अभाव बताकर मामले को दबा दिया जाता था। अब विश्वविद्यालय का नाम बड़े स्तर पर उछलने के बाद यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे और डिग्री लेकर जा चुके छात्र-छात्राएं सकते में हैं।
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एसटीएफ लखनऊ की टीम ने विश्वविद्यालय में छापे के दौरान बड़ी मात्रा में फर्जी मार्कशीट बरामद की थी। विश्वविद्यालय के चेयरमैन विजेंद्र सिंह समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इससे पहले भी मोनाड विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री और मार्कशीट के मामले सामने आते रहे हैं। 6 सितंबर 2021 को पिलखुवा पुलिस और साइबर सेल ने सीतापुर के थाना रामपुर मथुरा निवासी अमरेश और थाना कोतवाली के शास्त्री नगर निवासी शिवम पाण्डेय को गिरफ्तार किया था। आरोपियों से मोनाड यूनिवर्सिटी की मार्कशीट बरामद हुई थी। ह मामला सबूतों के अभाव में ठंडे बस्ते में चला गया था।
आठ नवंबर 2024 को कोतवाली पुलिस ने तीन लोगों के बैग से 140 फर्जी दस्तावेज बरामद किए थे, इसमें मोनाड विश्वविद्यालय हापुड़ की आठ मार्कशीट शामिल थीं। समय-समय पर दूसरे राज्यों की टीम भी यहां जांच के लिए आती रही हैं। कुछ दिन पहले ही गुजरात की एक टीम भी यहां जांच के लिए आई थी और कई दिन तक रुककर जांच की थी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि फर्जी मार्कशीट का यह जाल दूसरे प्रदेशों तक फैला हुआ है।
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सकते में हैं छात्र-छात्राएं
मोनाड विश्वविद्यालय को यूजीसी से मान्यता है। छात्रवृत्ति घोटाले के बाद इसे बाइक बोट के आरोपी विजेंद्र सिंह ने खरीद लिया था। करीब ढाई साल से नया प्रबंध तंत्र कार्य कर रहा है। करीब 58 एकड़ में फैले विश्वविद्यालय प्रांगण में इस सत्र में छह हजार से अधिक छात्र फार्मेसी, इंजीनियरिंग, मानविकी, प्रबंधन, कानून, कृषि, यूजी-पीजी और डाक्टरेक्ट कार्यक्रम में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
छात्रवृत्ति घोटाले में आया था नाम
वर्ष 2014 में विश्वविद्यालय में बड़ा छात्रवृत्ति घोटाला हुआ था। इस मामले में भी उत्तराखंड एसटीएफ ने हल्द्वानी में पहली एफआईआर दर्ज कराई थी। 28 छात्रों के नाम पर करीब 20,63,900 रुपये का घोटाला सामने आया था। मोनाड विश्वविद्यालय के उप निबंधक, इंडियन ओवरसीज बैंक के अज्ञात अधिकारियों-कर्मचारियों और बिचौलियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। टीम ने पाया था कि विश्वविद्यालय ने 150 सरकारी, संस्थागत, इंटर कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों के 1800 छात्रों का सत्यापन किया गया। इसमें पुलिस ने बाहरी प्रदेशों के 62 शिक्षण संस्थानों को भी जांच के दायरे में लिया था। इन शिक्षण संस्थानों के छात्रों को जिले के समाज कल्याण विभाग से छात्रवृत्ति बांटी गई थी। मामले में विश्वविद्यालय प्रबंध समिति के कई अधिकारियों के अलावा जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश सक्सेना को भी जेल हुई थी। बाद में राजेश सक्सेना की मौत हो गई थी। बाकी सभी आरोपी जेल से बाहर हैं।
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