नियमों को ताक पर रखकर सिंभावली के आसपास चल रहा खनन के खेल से भट्ठा संचालकों समेत खनन माफिया चांदी काट रहे हैं। माफिया किसानों को चंगुल में फंसाकर सोना उगलने वाली उनकी मिट्टी की उर्वरा शक्ति से खिलवाड़ कर रहे हैं।
फसलों के रूप में सोना उगलने वाली मिट्टी में छह इंच से नीचे वाली परत आते ही पोषक तत्व कम होने से उपजाऊ शक्ति क्षीण होने लगती है, जिससे किसानों को उन्नत पैदावार की बजाए अपनी मेहनत, भूमि का लगान और लागत अपेक्षित स्तर पर वापस मिलना भी चुनौती बन जाता है। हाईवे किनारे भराव के लिए बड़े स्तर पर मिट्टी का खनन हो रहा है।
वहीं सिंभावली समेत समूचे जनपद में डेढ़ सौ से भी अधिक भट्ठों की चिमनी जहर उगल रही हैं, जिनमें ईंट बनाने के लिए मिट्टी की खपत हो रही है। भट्ठा संचालक समेत खनन माफिया आमदनी के लालच में अशिक्षित किसानों को अपने जाल में फंसाकर उनके खेतों को ठेके पर ले लेते हैं और फिर शासन स्तर से तय नियमों की धज्जी उड़ाकर मनमाने ढंग में खनन कराने लगते हैं।
अवैध खनन की नहीं होती जांच
हाईकोर्ट ने ईंट भट्टे मालिकों को खनन की सीमा तय की है। परंतु इसके बाद भी भट्ठा संचालक मनमानी कर रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन तो दूर तहसील प्रशासन भी आंखें मूंदकर बैठा हुआ है।
एसडीएम शमशाद हुसैन का कहना है कि नियमों के विपरीत मिट्टी खनन की जांच कराई जाएगी, जिसमें मनमानी करने वाले भट्टा संचालकों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे तो बंजर हो जाएगी भूमि
कृषि विभाग के सहायक प्राविधिक सतीश चंद्र शर्मा का कहना है कि खेतों की मिट्टी में छह इंच तक परत उपजाऊ होती है। इसी में पोषक तत्वों की मात्रा बहुतायत में पाई जाती है। लेकिन भट्ठा संचालक नियमों के विपरीत कई फुट गहराई तक मिट्टी का खनन करा रहे हैं।
उन्नत खेती के लिए सबसे बड़ा खतरा है। मुरादनगर कृषि अनुसंधान केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ.अरविंद कुमार का कहना है कि खेती वाली भूमि में मनमाने ढंग से मिट्टी खनन होना उन्नत पैदावार के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इसलिए जिस भूमि में खनन हो चुका है उसके किसान सबसे पहले मिट्टी की जांच कराकर कम पाए जाने वाले पोषक तत्वों को वैकल्पिक रूप से पूरा करने के बाद ही फसलों की बुआई करें।