हापुड़। एल्डर्स कमेटी द्वारा हापुड़ बार के चार अक्तूबर को चुनाव की घोषणा करने पर बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल और पश्चिमी संघर्ष समिति पर भी आंदोलन को कमजोर करने के आरोप लगाए गए हैं।
हापुड़ बार के सचिव नरेंद्र शर्मा द्वारा जारी पत्र में कहा है कि अधिवक्ताओं पर हुए लाठीचार्ज के मामले में करीब 25 अधिवक्ताओं को गंभीर चोटें आई हैं, जिनका उपचार अस्पताल में चल रहा है। इस घटना के विरोध में प्रदेश भर के अधिवक्ता हड़ताल पर चले गए। लेकिन अब उत्तर प्रदेश बार काउंसिल और पश्चिमी संघर्ष समिति ने आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की है। जबकि घटना के विरुद्ध शांतिपूर्ण धरना अभी भी जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए हापुड़ बार के बर्खास्त और निष्कासित सदस्य भी आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुरानी एल्डर कमेटी को भंग किया जा चुका है और उनकी सदस्यता भी बार द्वारा समाप्त की जा चुकी है। ऐसे में इस कमेटी को चुनाव के संबंध में निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं है। ऐसे में आंदोलन जारी रहेगा।
वहीं अधिवक्ता अनिल आजाद ने भी उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के उस पत्र को सार्वजनिक किया है। उन्होंने कहा कि हम सब बार काउंसिल उत्तर प्रदेश के अधीन हैं। हापुड़ बार एसोसिएशन ने एल्डर्स कमेटी को खारिज करने का प्रस्ताव 19 अगस्त को उत्तर प्रदेश बार काउंसिल भेजा गया गया था। लेकिन इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था। तत्कालीन अध्यक्ष पांचू राम मार्या ने एल्डर्स कमेटी को पिछले वर्ष के चुनाव अधिकारी को ही नियुक्त कर चुनाव कराने के आदेश जारी किए थे।