मां बच्चे की पहली पाठशाला होती है। बच्चे की शुरूआती शिक्षा में मां की अहम भूमिका होती है। ऐसे में स्कूल में बच्चा प्रथम आता है या उसकी उपस्थित अव्वल रहती है तो इसका श्रेय उसकी मां देते हुए उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
शासन के निर्देश पर परिषदीय स्कूलों में यह व्यवस्था शुरू कर दी गई है। शासन की लाख कोशिशों के बावजूद परिषदीय स्कूलों के हालात नहीं सुधर रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या बच्चों की उपस्थित बढ़ाने की है।
इस स्थिति को देखते हुए शासन के आदेश पर परिषदीय स्कूलों में एक विशेष योजना शुरू की गई है। बच्चे अधिक से अधिक संख्या में स्कूल पहुंचें और पढ़ाई के प्रति प्रेरित हों। क्लास में सबसे अधिक उपस्थित हासिल करने व टॉप करने वाले बच्चे की मां को न सिर्फ सम्मानित किया जाएगा,
बल्कि मां को बीएसए की ओर से एक सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा। अभिभावकों को छात्रों को स्कूल भेजने व पढ़ाने के लिए प्रेरित करने को यह व्यवस्था लागू की गई है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र गुप्ता ने कहा कि मां बच्चे की पहली पाठशाला होती है। बच्चे को स्कूल भेजने से लेकर पढ़ाई में प्रेरित करने के लिए मां की अहम भूमिका होती है। माताएं अपनी इस भूमिका को समझें, इसके लिए उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए सम्मानित किया जा रहा है।