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Hapur News: कनिष्ठ लिपिक व संविदाकर्मी 70 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार

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गिरफ्तार कर्मचारियों को देहात थाने लेकर पहुंची मेरठ एंटी करप्शन की टीम।   - फोटो : संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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हापुड़। जिला बेसिक शिक्षा विभाग के कनिष्ठ सहायक दीपेंद्र और संविदा कर्मी निखिल शर्मा को एंटी करप्शन की टीम ने 70 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है। कार्यालय के बाहर स्थित चाय के खोखे के पास दोनों निजी स्कूल के प्रधानाचार्य से रुपये लेने आए थे, जहां उन्हें दबोचा गया। देहात थाने में रिपोर्ट दर्ज कर, सीएचसी में उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया।

मेरठ एंटी करप्शन टीम के निरीक्षक दुर्गेश कुमार ने बताया कि कुछ दिन पहले पिलखुवा क्षेत्र के शिवालिक ग्रीन स्थित भविष्य पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य सुकुमार पहाड़ी ने शिकायत कर बताया कि 19 अप्रैल को उनके विद्यालय में बीएसए रितु तोमर और कनिष्ठ सहायक दीपेंद्र ने निरीक्षण किया था।
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निरीक्षण के बाद कोई नोटिस नहीं दिया गया। लेकिन कनिष्ठ सहायक और विभाग का एक अन्य कर्मचारी निखिल लगातार उन्हें फोन कर पैसों की मांग करने लगे। लाखों में रुपये की मांग की गई, काफी दिनों तक तरह तरह की धमकी दी गई। परेशान होकर उन्होंने एंटी करप्शन टीम से शिकायत कर दी, इसके बाद टीम ने आरोपियों को दबोचने की योजना बनाई।

मंगलवार को दुर्गेश कुमार के निर्देशन में निरीक्षक मयंक अरोड़ा, योगेंद्र धामा, कृष्ण अवतार सिंह, उप निरीक्षक कृष्ण कुमार यादव, राहुल देव तोमर, जसवीर सिंह समेत 15 सदस्य टीम हापुड़ पहुंच गई। टीम के कहने पर सुकुमार पहाड़ी मंगलवार सुबह 70 हजार रुपए लेकर बीएसए कार्यालय के बाहर पहुंचे।

इसके बाद उन्होंने बीएसए कार्यालय के सहायक कनिष्ठ व संविदाकर्मी से संपर्क किया। दोनों ने उन्हें बीएसए कार्यालय के बाहर चाय की दुकान पर बुलाया। जैसे ही सुकुमार पहाड़ी ने दोनों को रिश्वत के रुपए थमाए वैसे ही एंटी करप्शन की टीम ने दोनों को दबोच लिया। इसके बाद टीम दोनों आरोपियों को लेकर थाना देहात देहात ले गई। जहां दोनों आरोपियों से पूछताछ कर, रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई की गई। साथ ही सीएचसी में दोनों का मेडिकल परीक्षण भी कराया गया।

भविष्य पब्लिक स्कूल का निरीक्षण 19 अप्रैल को किया गया था। लेकिन इसके दस दिन तक नोटिस को दबाकर रखा गया। बीएसए का दावा है कि कनिष्ठ सहायक को नोटिस में संशोधन कर भेजने के निर्देश दिए थे। नोटिस में स्कूल की मान्यता की समयावधि समाप्त हो जाने, पात्र शिक्षक नहीं रखे जाने, बिना मान्यता दसवीं तक की कक्षाएं चलाने जैसे आरोप लगाए गए हैं।

-दीपेंद्र पर मेहरबान थे अधिकारी-

कनिष्ठ सहायक दीपेंद्र पर अधिकारी शुरूआत से मेहरबान रहे। उन्हें लंबे समय से निजी स्कूलों का पटल दिया गया था। हर स्कूल संचालक इस पटल पर सुविधा शुल्क की बढ़ती डिमांड से परेशान था। लेकिन बिन वजह अधिकारी परेशान न करें, इसलिए शांत थे। जबकि संविदा कर्मी निखिल शर्मा को शिक्षामित्रों का पटल दिया गया था।

-नोटिसों की आड़ में होता है खेल-

विभाग से कई निजी स्कूलों को नोटिस जारी किए गए हैं। लेकिन इनमें कार्रवाई नगण्य है। पिछले दिनों अर्वाचीन स्कूल को भी नोटिस जारी हुआ। लेकिन निजी प्रकाशनों के कोर्स बिक्री पर कार्रवाई क्या हुई, इस बारे में अधिकारी बात तक नहीं करते। विभाग से जारी नोटिसों की मॉनिटरिंग कराई जाए तो इसमें भ्रष्टाचार के ऐसे कई मामले खुल सकते हैं।

प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ.आरपीएस चौहान की स्मृति में उनकी 78 वर्षीय पत्नी वीना चौहान भविष्य पब्लिक स्कूल चला रहीं हैं, जोकि एक ग्रामीण चैरिटेबल संस्था है। गरीब छात्रों की शिक्षा पर भी संस्था स्वयं खर्च उठाती है। इस संस्थान से रिश्वत मांगने के मामले में शासन तक बात पहुंची है।
बीएसए रितु तोमर ने बताया कि भविष्य पब्लिक स्कूल का निरीक्षण 19 अप्रैल को किया था। इसमें बहुत सी अनियमितताएं मिलीं। नोटिस भी तैयार कराया गया। विभागीय स्टॉफ द्वारा स्कूल से रिश्वत मांगने की कोई जानकारी उन्हें नहीं थी। कनिष्ठ सहायक दीपेंद्र को नोटिस स्कूल भेजने के निर्देश दिए थे।
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सीओ जितेंद्र शर्मा ने बताया कि ट्रैप टीम प्रभारी ने दीपेंद्र शर्मा और निखिल शर्मा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
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